Monday, April 22, 2024
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नए रिवर फ्रंट से पर्यटन में कोटा को मिलेगी नई उड़ान

( 12 सितंबर 2023 को चंबल रिवर फ्रंट के लोकार्पण पर विशेष )

वह दिन दूर नहीं जब कोटा में चंबल नदी पर नव विकसित रिवर फ्रंट देश का नया पर्यटन गंतव्य बन जाएगा। चंबल नदी के पूर्व और पश्चिम छोर के करीब साढ़े छ: किलोमीटर में विकसित इस साहकर में अनेक नई परिकल्पनाएं पर्यटकों का मन मोह लेंगी। देश का यह एक ऐसा स्थल बन जायेगा जिसे देखने के लिए पर्यटक अब अपना कार्यक्रम बना कर कोटा भी आयेंगे। कोटा उत्तर के विधायक और राजस्थान सरकार में नगरीय विकास मंत्री शांति धारीवाल की कोटा को पर्यटन सिटी बनाने की इच्छा शक्ति का यह खूबसूरत स्थल वैश्विक पर्यटकों को आकर्षित करने की पूरी शक्ति रखता है।

पर्यटकों को लुभाने के लिए ” कोटा नहीं देखा तो क्या देखा तो क्या देखा” की थीम पर एक साल तक प्रचार के लिए फिल्म कलाकार दीपिका पादुकोण और रणवीर को ब्रांड एंबेसेडर बनाया गया है। ये 13 सितंबर को कोटा आयेंगे और इसी दिन से प्रचार शुरू हो जाएगा। नगर विकास न्यास के साथ इनका अनुबंध हुआ है।

रिवर फ्रंट पर चंबल नदी में कश्मीर के शिकारे और स्पीड बोट में नौकायन, वाटरपार्क और घूमने के लिए चारों और नज़र आती गोल्फ कारें, देश – विदेश के लजीज व्यंजन, खरीदारी , ठहरने के लिए स्विस टेंट सिटी आदि की सुविधाएं और हरियाली, उद्यान, कृत्रिम झरनों, संगीतमय फव्वारों के आकर्षण ने इसे अच्छे खासे पर्यटन स्थल के रूप में विकसित कर दिया है। आगामी 12 सितंबर को प्रदेश के मुख्य मंत्री अशोक गहलोत अपनी मंत्री परिषद और विशिष्ठ मेहमानों के साथ भव्य आयोजन के साथ लोकार्पण की रस्म अदा कर चंबल माता की प्रतिमा की प्रथम बार आरती करेंगे।

आने वाले पर्यटकों के लिए दुनिया की सबसे बड़ी घंटी, चंबल माता की ऊंची प्रतिमा, नेहरू जी का सबसे बड़ा मुखौटा, सबसे बड़ा नंदी, अदृश्य योगी, राजस्थानी स्थापत्य की प्रसिद्ध 9 इमारतों की अनुकृति, विशाल बावड़ी, दक्षिण भारत का शिल्प, वृंदावन उद्यान में 10 अवतारों की प्रतिमाएं, नदी के पास पहला वाटर पार्क, बुलंद दरवाजा की अनुकृति, और खूबसूरत 22 घाट खास आकर्षण होंगे।

अनेक विशेषताओं से नव विकसित चंबल रिवर फ्रंट को देखने के लिए हम पश्चिमी छोर के कोटा बैराज सकतपुरा की ओर से शुरू हो कर पूर्वी छोर के आखरी पड़ाव चंबल माता की प्रतिमा तक आपको ले चलते हैं। कोटा बैराज के सामने नए पुल से सकतपुरा की ओर से प्रवेश करने पर पहला नेहरू घाट है जिस पर नेहरू जी के चेहरे का विश्व का सबसे बड़ा चेहरा दिखाई देता है। अब आता है गीता घाट जहां भगवान कृष्ण गीता का उपदेश देते हुए दीवारों पर चित्रों में दिखाई देते हैं और सफेद मार्बल की अनेक शिलाओं पर गीता के उपदेश उत्कीर्ण किए गए हैं। आगे वैदिक घाट पर अदृश्य योगी, विश्व की सबसे बड़ी नंदी मूर्ति और इसके पार्श्व में नृत्य मुद्रा में नटराज बने हैं।रोशन घाट पर आमेर किले की जालियां और एक मस्जिद है। आगे दिखाई देगी विश्व की सबसे बड़ी घंटी। वीर शिवाजी और वीर शिरोमणि महाराणा प्रताप की आकर्षक मूर्तियों से शोर्य का संदेश देते शोर्य घाट के पीछे बने हैं व्यवसायिक भवन और कार्यालय भवन।

आगे चलने पर पहुंचते हैं राजपूत घाट पर जहां देखने को मिलते हैं जोधपुर की हवेली, जयपुर का हवामहल, आमेर किले का कलात्मक गणेश पोल और सरगासूली, उदयपुर का जगविलास, बीकानेर जोधपुर और जैसलमेर के किलों, रणकपुर मंदिर, और रणथंभौर का गणेश मदिर की इमारतें इसकी शोभा बढ़ाती हैं। समीप ही नज़र आता है पर्यटन थीम ” पधारों म्हारो देस” पर बना हाड़ोती द्वार। आगे है थाइलैंड के उद्यान
सदृश्य जुगनू घाट। दीवार पर खूबसूरत हाड़ोती के ग्रामीण क्षेत्र के 12 मांडनों के साथ पांच हाथी जिनकी सूंड से जलधारा निकलती दिखाई देती है , हाथी घाट। इसके आगे पत्थरों के दो बड़े बड़े आर्च जो फतेहपुर सीकरी के बुलंद गेट जैसे हैं। अब पश्चिमी छोर के आखिरी पड़ाव पर दिखाई देती है भगवान शिव की साढ़े तीन वजन की भव्य प्रतिमा और चार पत्थरों पर 128 बार लिखी राम-राम की शिलाएं।

रिवर फ्रंट के पूर्वी छोर पर नयापुरा की तरफ से भव्य और खूबसूरत वृदावन उद्यान पाला पड़ाव है। यहां देखने को मिलता है राजस्थानी बावड़ियों का अप्रतिम स्थापत्य लिए एक भव्य बावड़ी, आर्च की डिजाइन, जैसे युद्ध की तैयारी में हों 5 घोड़े, चंबल रिवर फ्रंट का करीब 6 फीट का लोगो और शुभंकर। सिंहघाट पर वियतनाम मार्बल के निर्मित 6 सिंह प्रतिमाएं और इनके पीछे 16 व्यावसायिक शोरूम। आगे हैं दो लुभावने कृत्रिम फव्वारें और तारे जैसी आकृतियां। आगे है साहित्य घाट जिस पर वियतनाम मार्बल पत्थर से बनी करीब एक सो मीटर लंबी किताब और अल्बर्ट आइंस्टीन की कला दीर्घा। आगे चलने पर संगीतमय फव्वारा और प्यानो की आकृति का खुला रंगमंच। कनक घाट पर स्वर्ण सदृश्य नज़र आते 4 डोम तथा बच्चों और बड़ों के लिए वाटरपार्क। विष्णु घाट पर दिखाई देते हैं विष्णु के 12 अवतारों की प्रतिमाएं और यही लगाए गए हैं तुलसी के 500 से अधिक पोधे।

आगे है हाड़ा रानी,पन्नाधाय की प्रतिमाएं और बूंदी की चौरासी छतरी की अनुकृति से सजा हाड़ोती घाट। इसके आगे विश्व मैत्री घाट पर अमेरिका का व्हाइट हाउस, चाइना का पैगोडा, दिल्ली का लाल किला सहित 7 देशों की इमारतों का स्थापत्य, दक्षिण शैली के मंदिर बने हैं। शांति घाट पर 12 राशियों का जंतर मंतर बनाया गया है। इसके आगे है पर्यटकों को ठहरने के लिए स्विस टेंट सिटी और इसके सामने गन मेटल से बने पांच ऊंट। आखिरी पड़ाव पर बैराज गार्डन में राजस्थान की जीवन रेखा चंबल नदी माता की विश्व की सबसे बड़ी 252 फुट ऊंची मूर्ति, दो कृत्रिम झरने और बारसिलों का सबसे बड़ा म्यूजिकल फाउंटेन।

पर्यटन नगरी बनाने का सपना संजो कर विकसित यह पर्यटन स्थल अपनी अनूठी विशेषताओं से पर्यटकों को लुभाने की पूरी शक्ति रखता है। इस सपने को साकार रूप देने में जहां ब्रांड एंबेसेडर की भूमिका अहम भूमिका निभाएगी वहीं पैलेस ऑन व्हील पर्यटक ट्रैन का कोटा में ठराव और शीघ्र हवाई सेवा की सुविधा भी सोने पे सुहागा होगा।

डॉ.प्रभात कुमार सिंघल
पर्यटन विशेषज्ञ लेखक, कोटा

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