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लक्ष्मणरेखा सीता के लिए नहीं, रावण के लिए थी : प्रो. नीरजा गुप्ता

माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस पर विशेष आयोजन

भोपाल। सीता के लिए कभी लक्ष्मणरेखा थी ही नही, वह तो रावण को रोकने के लिए खींची गई थी। परन्तु हमारे यहाँ कुछ लोगों ने ऐसा नैरेटिव खड़ा कर दिया कि लक्ष्मणरेखा सीता के लिए खींची गई। दरअसल, हमने अपने प्रतिमान कमजोर कर लिए हैं। यह विचार साँची विश्वविद्यालय की कुलपति प्रो. नीरजा गुप्ता ने व्यक्त किये। अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के प्रसंग पर माखनलाल चतुर्वेदी राष्ट्रीय पत्रकारिता एवं संचार विश्वविद्यालय में आयोजित विशेष कार्यक्रम में प्रो. गुप्ता बतौर मुख्य अतिथि उपस्थित थीं। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने की।

‘नारी नेतृत्व – एक समान भविष्य की ओर’ विषय पर आयोजित कार्यक्रम में प्रो नीरजा गुप्ता ने कहा कि रामायण-महाभारत के प्रसंगों के आधार पर बताया कि हमें अपनी परम्परा में शामिल श्रेष्ठ नारियों के जीवन को देखने का दृष्टिकोण बदलना होगा। उन्होंने कहा कि माता कुंती जंगल में भटकने वाली अबला नारी नहीं थीं, वे सम्राज्ञी थीं। उनसे बड़ा रणनीतिकार कोई नहीं था। इसके साथ ही प्रो. गुप्ता ने कहा कि कई बार हमें आंकड़े दिखा कर सुखद अनुभूति कराई जाती है। लेकिन आंकते हमेशा सत्य नहीं बताते हैं। आंकड़ों के पीछे जो कहानियाँ होती हैं, उन्हें अनुभव ही किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि घर में एक बेटी के बाद दूसरी बेटी का जन्म हो जाये तो परिवार के लोगों के चेहरे उतर जाते हैं, यह बात आंकड़ों से पता नहीं चलती है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने कहा कि पत्रकारिता के क्षेत्र में महिला पत्रकारों की संख्या बहुत कम है। छोटे शहरों एवं कस्बाई क्षेत्रों में तो महिला पत्रकार नगण्य हैं। इस क्षेत्र में और महिलाएं आयें, इसके लिए एक वातावरण बनाने की आवश्यकता है। अभी स्थिति यह है कि अच्छी महिला पत्रकारों को भी पुरुष पत्रकारों के समान वेतन नहीं मिलता है। हमें उन महिला पत्रकारों का सम्मान करना चाहिए, जिन्होंने अनेक प्रकार की चुनौतियों और प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करते हुए अपनी एक जगह बनाई है। प्रो. सुरेश ने कहा कि विज्ञापनों का जिक्र करते हुए कहा कि विज्ञापनों में जिस प्रकार से एक वस्तु के रूप में महिलाओं की प्रस्तुति की जाती है, वह बंद होनी चाहिए।

इस अवसर पर विशिष्ट अतिथि उपन्यासकार सुश्री इंदिरा दांगी ने कहा कि साहित्य तसल्ली से की गई पत्रकारिता है और पत्रकारिता जल्दी में लिखा गया साहित्य। उन्होंने अपनी बात को आगे बढ़ाते हुए कहा कि हर संस्थान में एक बड़े हिस्से में महिलाएं काम करती है लेकिन उच्च पदों पर महिलाएं नहीं दिखती हैं। उन्होंने वेदों का जिक्र करते हुए कहा कि वेदों की बहुत सारी ऋचाओं को स्त्रियों ने लिखा है। जिस देश में ऐसी महान स्त्रियाँ थी, उस देश में स्त्रियाँ कैसे पिछड़ गयीं, यह विचार करना चाहिए।

‘नारी नेतृत्व–एक समान भविष्य की ओर’ केंद्रीय विषय पर आयोजित कार्यक्रम के अंतर्गत विश्वविद्यालय के सभी परिसरों में विभिन्न प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया। विद्यार्थियों के लिये कहानी वाचन, फोटोग्राफी और समस्त स्टाफ़ के लिए कविता लेखन, फीचर लेखन तथा निबंध लेखन प्रतियोगिताओं का आयोजन किया गया था । इन प्रतियोगिताएं के विजेताओं को इस अवसर पर पुरस्कृत भी किया गया। इस अवसर पर विद्यार्थियों ने महिलाओं पर केंद्रित एक लघु नाटिका का मंचन भी किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. केजी सुरेश ने एलुमनी सेल के लिए वेबसाइट पर एक पेज का उद्घाटन भी किया। इसके साथ ही पुस्तक ‘स्त्री शक्ति संवाद’ का भी विमोचन किया गया। पुस्तक की संपादक प्रो. पी. शशिकला एवं सह-संपादक डॉ. पवन सिंह और लोकेन्द्र सिंह हैं। कार्यक्रम का संचालन सहायक कुलसचिव विवेक सावरीकर ने किया। प्रतियोगिताओं का समन्वयन सहायक प्राध्यापिका गरिमा पटेल ने किया।

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