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अब हिंदी में भी पढ़ने को मिलेगा प्रसिद्ध उपन्यास ‘जया गंगा’

जाने-माने लेखक विजय सिंह द्वारा लिखित उपन्यास ‘जया गंगा’ (Jaya Ganga) अब हिंदी में भी उपलब्ध है। इस उपन्यास का हिंदी में अनुवाद जाने-माने कवि और वरिष्ठ पत्रकार मंगलेश डबराल ने किया है। इसे ‘द फ्रेंच इंस्टीट्यूट इन इंडिया’ (The French Institute In India) के सहयोग से प्रसिद्ध हिंदी पब्लिकेशन हाउस ‘राजकमल प्रकाशन’ (Rajkamal Prakashan) द्वारा प्रकाशित किया गया है।

बता दें कि हिंदी में इसका अनुवाद करने वाले मंगलेश डबराल का कोविड-19 के कारण पिछले साल दिसंबर में निधन हो गया है। ‘जया गंगा‘प्रेम की तलाश में एक आकर्षक यात्रा की कहानी है, जो आत्मकथात्मक शैली में लिखी गई है।

पहली बार प्रकाशित होने के साथ ही इस उपन्यास को अंग्रेजी और फ्रेंच पाठकों के बीच जबरदस्त लोकप्रियता मिली है। इस पर आधारित फिल्म को दुनिया भर के दर्शकों से असाधारण प्रशंसा भी मिली है।

इस बारे में भारत में फ्रांस के राजदूत इमैनुएल लेनिन का कहना है, ‘जया गंगा का हिंदी में अनुवाद किया जाना भारतीय और फ्रांसीसी संस्कृतियों के बीच संयोजन का एक आदर्श उदाहरण है। उपन्यास के लेखक विजय सिंह को कई विधाओं में महारत हासिल है। फ्रांस सरकार इस प्रोजेक्ट को लेकर उत्साहित है और इसका पूरा समर्थन करती है। इस बात में मुझे कोई संदेह नहीं है कि यह कई हिंदी भाषियों के लिए खुशी की बात होगी।’

वहीं, राजकमल प्रकाशन के प्रबंध संचालक श्री अशोक माहेश्वरी का इस बारे में कहना है, ’राजकमल प्रकाशन में हम न केवल इस बात से रोमांचित हैं कि जया गंगा भारत में हिंदी में प्रकाशित हो रही है, बल्कि यह हमारे लिए एक मार्मिक क्षण भी है, क्योंकि यह मंगलेश डबराल द्वारा किया गया अंतिम अनुवाद है। लिखित शब्द और गंगा दोनों ही हमेशा के लिए अपनी यात्रा जारी रखेंगे और पाठकों के मन पर नई-नई छाप छोड़ेंगे।’

सबसे पहले यह उपन्यास फ्रेंच में 1985 में पब्लिश हुआ था और 35 वर्षों से लगातार प्रकाशित हो रहा है। इसका नया अंग्रेजी संस्करण शीघ्र ही फिर से जारी किया जाएगा। हिंदी में जया गंगा अब राजकमल प्रकाशन की वेबसाइट और अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध है।

साभार –https://www.samachar4media.com/ से

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