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वैचारिक जागृति का मजबूत मंच बन कर उभरा सोशल मीडिया

कविताओं, समाचार पत्रों और यात्राओं से देश की आजादी के लिए अलख जनमत की चिंगारी बन गई। वैचारिक जनमत निर्माण से आजादी प्राप्त हुई। हमारे परम्परागत माध्यमों के साथ – साथ रेडियो, टीवी, समाचार पत्र, समाचार पोर्टल्स और अनेक चैनल्स के बीच एक मजबूत मंच आया सोशल मीडिया। इस मीडिया के जरिए आज वैचारिक जागृति और जनमत निर्माण का महत्व सर्वव्यापी है। आम आदमी के साथ – साथ आज हर क्षेत्र में चाहे वह सामाजिक, व्यापारिक, मनोरंजन या राजनीतिक हो सभी अपने विचारों के प्रसार के लिए सोशल मीडिया का भरपूर उपयोग कर रहे हैं।

सोशल मीडिया में विचारों की स्वतंत्रता पर न कोई डर है और न किसी का दबाव। विशेषता यह है कि बिना इंतजार के यह सबसे तेज गति का संवाहक माध्यम बन गया हैं। मिनटों सेकिडों में विचारों का प्रसार न केवल देश वरन दुनिया में हो जाता हैं। कहने में कोई अतिशयोक्ति नही होगी कि दुनिया में अपनी बात पहुंचना मिनटों – सेकेंडों का खेल हो गया है।

सोशल मीडिया के सदुपयोग और दुरुपयोग की बहस में न जा कर इसके सद उपयोग पर ही केन्द्रित रहें तो उपभोक्ता इस मंच का अपनी रुचि के अनुसार वैचारिक जागृति के लिए बखूबी उपयोग कर रहे हैं। चर्चा हम सामाजिक क्षेत्र से करें तो पाएंगे कि सदविचरों, परिवार का महत्व, बुजुर्गो के खोए सम्मान को पुनर्स्थापित करने, महिलाओं की सुरक्षा,समाज और परिवार में उनका महत्व, लैंगिक समानता, शिक्षा, स्वास्थ्य जैसे अनेक पारिवारिक एवम सामाजिक विषयों पर यह मंच दमदार भूमिका में दिखाई देता हैं। मीलों दूर के रिश्तेदारों को आपस में जोड़ें रखता है। हाल ही में कोरोना जैसी वैश्विक महामारी में बचाव के लिए जागृति जगाने में इसकी भूमिका किसी से छुपी नहीं है।

समाज में हर दिन होने वाले अपराधों,बलात्कार,शोषण, अपहरण, भ्रष्टाचार, आर्थिक अपराध कालाबाजारी आदि की पोल खोलने और इनके प्रति जनमत निर्माण में मंच की भूमिका साफ दिखाई देती हैं। कई अपराधों का पता लगाने में भी यह मददगार बन रहा है। कोई मुद्दा ऐसा नहीं जहां सोशल मीडिया की घमक नहीं हो। आज राजनीति लोगों के लिए यह जनमत निर्माण की अहम भूमिका में नजर आता है। वर्ष 2014 के आम चुनाव के दौरान राजनीतिक पार्टियों ने जमकर सोशल मीडिया का उपयोग कर आमजन को चुनाव के जागरूक बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका अदा की थी। इस आम चुनाव में सोशल मीडिया के उपयोग से वोटिंग प्रतिशत बढ़ा, साथ ही साथ युवाओं में चुनाव के प्रति जागरूकता बढ़ी। तब से चुनावों के लिए यह एक सशक्त माध्यम बन गया है।

सोशल मीडिया के माध्यम से ही ‘निर्भया’ को न्याय दिलाने के लिए विशाल संख्या में युवा सड़कों पर आ गए जिससे सरकार दबाव में आकर एक नया एवं ज्यादा प्रभावशाली कानून बनाने पर मजबूर हो गई। विशिष्ट अवसरों पर संदेशों भेजने के लिया ट्विटर टीवी चैनलों के लिए भी समाचार का श्रोत बन रहा है।

सोशल मीडिया सकारात्मक भूमिका अदा कर जिससे किसी भी व्यक्ति, संस्था, समूह और देश आदि को आर्थिक, सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक रूप से समृद्ध बनाता है। सोशल मीडिया के जरिए ऐसे कई विकासात्मक कार्य हुए हैं जिनसे कि लोकतंत्र को समृद्ध बनाने का काम हुआ है जिससे किसी भी देश की एकता, अखंडता, पंथनिरपेक्षता, समाजवादी गुणों में अभिवृद्धि हुई है। कई उदाहरण इन बातों को पुष्ट करते हैं जिनमें ‘ इंडिया अगेंस्ट करप्शन ‘ को देख सकते हैं, जो कि भ्रष्टाचार के खिलाफ महाअभियान था जिसे सड़कों के साथ-साथ सोशल मीडिया पर भी लड़ा गया जिसके कारण विशाल जनसमूह अन्ना हजारे के आंदोलन से जुड़ा और उसे प्रभावशाली बनाया।

इस मीडिया के उपयोगकर्ताओं ने अपनी रुचि के पेज बना लिए हैं और अपने विचारों का प्रचार करते हैं। विद्वान शिक्षक पाठ्यक्रम आधारित अपने यूटयूब चैनल बना कर विद्यार्थियों को ज्ञानवर्धक सामग्री उपलब्ध करा रहे हैं। कला – संस्कृति आदि के प्रसार के लिए नई पीढ़ी के अनेक चैनल उपलब्ध हैं।भारत की महान संस्कृति का खूब प्रचार हो रहा है। हिंदी साहित्य की कई विधाएं साहित्य के प्रति जागृति करते नजर आती हैं। पुस्तक प्रकाशकों ने आकर्षक पुस्तकों को कम लागत पर प्रकाशित करने के प्रचार का मंच बनाया हैं। अन्य उपभोक्ता वस्तुओं के लिए यह मार्केटिंग का महत्वपूर्ण टूल बन गया हैं।

सोशल मीडिया ने प्रिंट मीडिया से अलग अपना एक नया मुकाम बना लिया है। अपने विचार, अपनी अभिव्यक्ति, अपनी स्वतंत्रता और अपना मंच। न कोई विज्ञप्ति बना कर भेजने का झंझट और न प्रकाशित होने का इंतजार। प्रकाशित नहीं होने पर मायूसी से मुक्ति। जब मन में कोई विचार आया तुरन्त अभिव्यक्ति का त्वरित साधन – माध्यम।समाज को कोई भी वर्ग इस माध्यम से अछूता नहीं। न कोई बड़ा न कोई छोटा, क्या अमीर क्या गरीब सभी का अपना मजबूत मंच। यह मंच आज सभी उपलब्ध माध्यमों में सबसे त्वरित बन संप्रेषण बन गया है। दुनिया में कहीं भी हुई धटना या संदेश एक पल में लाखों लोगों तक पहुंच जाता है और सुबह छप कर आने वाले समाचार पत्र तक जनमत निर्माण की मजबूत भूमिका में बदल जाता है।

और तो और रोजगार का भी माध्यम बन गया है सोशल मीडिया। अतिव्यस्त लोगों को प्रशिक्षित और दक्ष लोगों की जरूरत होती है जो उनकी और से इसे देख सकें, सम्भाल सकें। सोशल मीडिया एक्टिविस्ट्स के लिए इस क्षेत्र में जरूरत बन गई है जो इसके विशेषज्ञ हैं। यूटयूब चैनल्स भी रोजगार का जरिया बन गए हैं।

आम व्यक्तियों में फेसबुक सबसे ज्यादा लोकप्रिय हैं। इस के लिए उपयोगकर्ता क्या चाहते हैं और क्या सोचते हैं इस पर जब मैने एक दशक से जुड़े सोशल एक्टिविस्ट्स एडवोकेट अख्तर खान ‘ अकेला ‘ से चर्चा की तो वह कहते हैं कि पाठक चाहते हैं इससे समाज में प्रेम, शांति, भाईचारे और देशभक्ति का पैगाम लोगों तक पहुंचे। सामाजिक समरसता का माहौल बने। लोगों के दुख – सुख का साथी बने। खुशहाल परिवार, स्वास्थ्य, शिक्षा और सामाजिक बुराइयों को दूर करने का मंच बने। यह खुशी की बात है कि इन क्षेत्रों में स्वास्थ्य जनमत निर्माण करने में फेसबुक अपनी महत्वपूर्ण भूमिका में दिखाई देता है।

बहुत कम समय में मोबाइल जैसे संचार माध्य्म ने आम जन तक अपनी पहुच बनाई, इतनी जल्द पहले का कोई भी संचार माध्य्म लोकप्रिय नहीं हुआ। मोबाइल आज की जीवन पद्दति का अनिवार्य हिस्सा बन चुका है। इसके महत्व के बारे में एक शब्द में कहें तो कह सकते हैं दुनिया मुठ्ठी में है। रेडियो,एफएम,टीवी और फिल्में भी कंप्यूटर जैसी खूबियां मोबाइल के छोटे से यंत्र में समा गई हैं।

संदेश भेजने एवं वापस उत्तर प्राप्त करने में डाक से लगने वाले कई दिनों के समय को सेकिंडो में बदल दिया। बटन दबाओ ऑडियो-वीडियो संगीत, फिल्म,सीरियल, देश- विदेश की न्यूज,ताजा घटनाक्रम,विविध प्रकार के मनोरंजन, गूगल पर दुनिया की हर प्रकार की पलक झपकते ही जानकारी सामने तथा हर चीज के ऍप्स उपलब्ध हैं।सूचनाओं और ज्ञान का भंडार अपने में समाये लाइफ टेलीकॉस्ट, बैंकिंग कार्य, किसी भी प्रकार की यात्रा का रिजेर्वेशन, टूर प्रोग्राम बनाने, किसी भी प्रकार की बुकिंग कराने, ओन लाइन खरीददारी जैसी सुविधाओं ने इसकी स्वीकार्यता एवं ग्राहिता को दुगनित कर दिया है।

आपके सामाजिक-धार्मिक कार्यक्रम, पर्यटन के यादगार पल,जीवन की महत्वपूर्ण घटना आदि की यादें संजोए रखने के लिए फोटो एवं वीडियो लेने के लिये कैमरा भी तैयार है। नींद से जगाने के लिये अलार्म सुविधा भी मौजूद। कंप्यूटर ने मानव जीवन को विविध प्रकार सुविधाजनक बना कर मनोरंजन एवं ज्ञान सम्प्रेषण का प्रबल माध्य्म बना दिया है।
आपको बतड़ें कि मोबाइल का उपयोग एडिक्ट बनकर नहीं किया जावे, स्वास्थ्य को ध्यान में रख कर संतुलन के साथ उपयोग हो। छोटी उम्र में बच्चों को यथा सम्भव इससे दूर ही रखे।बच्चों द्वारा उपयोग करते समय उन पर नजर जरूर रखे। बच्चों को उनकी शिक्षा, ज्ञान बढाने,स्वाथ्य मनोरंजन करने की दृष्टि से उपयोग पर बल दें। बच्चों को मोबाइल से सामान्य ज्ञान बढाने,अच्छी पेंटिंग्स बनाने, पाठ्यक्रम सम्बन्धी जानकारी प्राप्त करने,संगीत वाद्य बजाने जैसे क्रियाकलापो से जोड़ सकते हैं।संघीय संचार आयोग के अनुसार मोबाइल फोन के उप्योगकर्ताओं को न्यूनतम 20 सेंटीमीटर की दूरी अपने हैंडसेट से रखना जरूरी है जिससे विकिरण का प्रभाव कम होता है।

लोकप्रियता के प्रसार से जनमत निर्माण में सोशल मीडिया एक मजबूत प्लेटफॉर्म बन कर उभरा है, जहां व्यक्ति स्वयं को अथवा अपने किसी उत्पाद को ज्यादा लोकप्रिय बना सकता है। आज फिल्मों के ट्रेलर, टीवी प्रोग्राम का प्रसारण भी सोशल मीडिया के माध्यम से किया जा रहा है। वीडियो तथा ऑडियो चैट भी सोशल मीडिया के माध्यम से सुगम हो पाई है जिनमें फेसबुक, व्हॉट्सऐप, इंस्टाग्राम कुछ प्रमुख प्लेटफॉर्म हैं।
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लेखक( स्वतंत्र अधिस्वीकृत पत्रकारं और जन सम्पर्क कर्मी हैं।)
1- एफ-18,RHB कॉलोनी, कुन्हाड़ी
कोटा, राजस्थान

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