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स्वदेशी सामाजिक नेटवर्क इनबुक गाँवों में चला रहा है सौ से अधिक पुस्तकालय

मुंबई। जैसा कि आप में से अधिकांशतः लोग जानते हैं कि इनबुक एक स्वदेशी सामाजिक नेटवर्क है , जो कि अपने नाम से ही नहीं बल्कि अपने सामाजिक कार्यों से भी जाना जाता है। इनबुक अपने सामाजिक दायित्वों का निर्वहन पिछले 5 सालों से लगातार कर भी रहा है। इनबुक नेटवर्क का मानना है कि पुस्तकों से लोगों की बढ़ती हुई दूरी का दुष्परिणाम हमारी सोच व विचारों पर पड़ रहा है। हम दूसरों की थोपी जा रही विचारधारा से प्रभावित होकर अपना भला बुरा नहीं समझ पाते हैं, इसका प्रमुख कारण सिर्फ पुस्तकों से बढ़ती हमारी दूरी है। इस कमी को पूरा करने के लिए इनबुक एक अभियान हर गाँव में हो “मेरा अपना पुस्तकालय” चला रहा है जिसके अंतर्गत देश के 4 राज्यों में 100 के अधिक पुस्तकालय स्थापित किए जा चुके हैं और सभी चल रहे हैं और गाँव-2 में इनकी लोकप्रियता दिन-प्रतिदिन बढ़ रही है।

पहले से ही देश के शहीद सैनिकों के सम्मान और उनकी स्मृति को संजोए रखने का इनबुक का इतिहास रहा है। इसके लिए इनबुक नेटवर्क की एक अपील “एक दीया शहीदों के नाम” पर लोगों ने 21 जून 2020 को दीप प्रज्वलित कर शहीदों को श्रद्धांजलि समर्पित की और इस अभियान की लोगों ने काफी सराहना की।

इनबुक नेटवर्क ने बताया कि हम पहले से ही पुस्तकालयों में पुस्तक के ऊपर शहीदों के नाम अंकित कर रहे हैं। इस बार हम पुस्तकालयों का नामकरण भी वीरगति प्राप्त सैनिकों के नाम पर करेंगे।

गलवान घाटी में शहीद हुए सैनिकों के नाम पर होंगे 20 पुस्तकालय

इनबुक की निदेशक अधिवक्ता नलिनी मिश्रा ने बताया कि “इनबुक ने निश्चय किया है कि 20 पुस्तकालय गलवान घाटी में शहीद हुए सैनिकों के नाम पर होंगे और हर पुस्तकालय के अंदर एक अमर ज्योति भी रखी जाएगी। जिससे हमारे अमर वीर शहीद सैनिकों की बहादुरी की गाथा जन-जन तक पहुँचेगी और आमजन उनकी शौर्य गाथा को जान सकेंगे।”

कैफे सोशल की पहल जरा याद करो कुर्बानी

नलिनी मिश्रा ने बताया कि इसके साथ ही इनबुक नेटवर्क द्वारा प्रकाशित मासिक पत्रिका कैफे सोशल के आने वाले संस्करणों में “जरा याद करो कुर्बानी” की श्रृंखला में 4 से 5 शहीदों के बारे में विशेष आलेख हर अंक में प्रकाशित किये जाएँगे । हम अतिशीघ्र नए पुस्तकालयों का शुभारंभ आपके गाँवों व छोटे शहरों में भी करेंगे । आप भी इनबुक के इस अभियान से जुड़कर पुस्तकालयों में पुस्तकें दान कर सकते हैं, इन पर आपका या आपके परिजनों का नाम लिखा जाएगा। आज ही जुड़े इनबुक से और इस अभियान को सफल बना कर समाज व देश की उन्नति में अपना योगदान दें।

इनबुक सामाजिक नेटवर्क गूगल प्लेस्टोर पर उपलब्ध है जिसे इनबुक अथवा InBook लिखकर खोज सकते हैं।

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