Sunday, June 16, 2024
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वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा स्थापित देश के प्रथम आधुनिक गुरुकुल की फिल्म का 15 अक्टूबर को मुंबई में

मुंबई। विभिन्न वनवासी बालिकाओं के सर्वांगीण विकास में पिछले सात वर्षों से उल्लेखनीय भूमिका निभा रहे वनवासी कल्याण आश्रम द्वारा स्थापित देश के प्रथम आधुनिक गुरुकुल की महत्वपूर्ण गतिविधियों पर आधारित सुरुचिपूर्ण एवं जानकारीपरक फिल्म का लोकार्पण रविवार, 15 अक्टूबर, 2023 की शाम 5.30 बजे मुंबई के अंधेरी स्थित सेलेब्रेशन स्पोर्ट्स क्लब के सभागार में आयोज्य गरिमापूर्ण समारोह में किया जायेगा।

यह जानकारी देते हुए वनवासी कल्याण आश्रम के अध्यक्ष ललित बाहेती ने बताया कि इस लघु वृतचित्र में केन्द्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली में कार्यरत वनवासी कल्याण आश्रम के रानी दुर्गावती छात्रावास, रांधा में वैदिक शिक्षा, कौशल विकास एवं लौकिक शिक्षा हेतु पिछले सात वर्षों से वनवासी बालिकाओं के लिए संचालित देश के प्रथम आधुनिक गुरुकुल के सामाजिक प्रभाव को आकर्षक ढंग से दर्शाया गया है। इस लोकार्पण समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में वरिष्ठ साहित्यकार एवं नवभारत टाइम्स के सम्पादक सुन्दरचंद ठाकुर और किसान ग्रुप के प्रबंध निदेशक रमेश अग्रवाल तथा विशेष अतिथि के रूप में मुख्य आयकर आयुक्त, मुंबई राजेश रंजन प्रसाद सहित विभिन्न गणमान्य अतिथिगण मौजूद रहेंगे।

समारोह में लोकार्पण के अलावा गुरुकुल की बालिकाओं द्वारा रंगारंग सांस्कृतिक कार्यक्रम भी प्रस्तुत किया जायेगा। उन्होंने बताया कि इस लघु वृतचित्र का निर्माण आकाशवाणी के वरिष्ठ उद्घोषक और महाराष्ट्र राज्य हिंदी साहित्य अकादमी के कार्यकारी सदस्य आनंद सिंह द्वारा किया गया है, जिसमें आलेख को अंतिम रूप और पार्श्व स्वर भी उन्होंने ही दिया है। ललित बाहेती ने बताया कि सदियों से उपेक्षित और आधुनिक सुविधाओं से वंचित वनवासी भाई-बहनों को देश की मुख्य धारा से जोड़ने और उनकी जीवन शैली उन्नत बनाने की रफ़्तार तेज़ करने के लिए वनवासी कल्याण आश्रम ने अपने एक नये प्रयोग के साथ शिक्षा का एक नया मॉडल तैयार किया, जिसे आधुनिक गुरुकुल का नाम दिया गया।

आदिवासी समाज की नई पीढ़ी, विशेष रूप से बेटियों की शिक्षा व्यवस्था में सुधार के सकारात्मक कदम उठाने तथा उन्हें कौशलयुक्त और गुणात्मक शिक्षा प्रदान करने के उद्देश्य से केन्द्र शासित प्रदेश दादरा एवं नगर हवेली में वापी-सिलवासा मार्ग पर, सिलवासा से करीब 16 किलोमीटर की दूरी पर घने जंगलों के बीच रांधा गाँव में इस रानी दुर्गावती बालिका छात्रावास की स्थापना, वनवासी छात्राओं के जीवन को उच्च कोटि का अनुभव प्रदान करने की एक स्वप्नस्थली के रूप में की गई। उन्होंने बताया कि प्रत्येक जनजातीय समाज की अपनी भाषा, लोककथाऍं, लोकनृत्य, इतिहास, पूजा पद्धति, प्रथाऍं, रीति – रिवाज़ और त्योहारों की एक समृद्ध विरासत रहती है।

इसी परम्परागत सांस्कृतिक विरासत से छेड़छाड़ किये बिना, विकास की नई डगर पर उन्हें आगे ले चलने की जटिल चुनौतियाँ को आश्रम ने स्वीकार किया और नैतिक एवं सांस्कृतिक मूल्यों को ध्यान में रखते हुए, वर्ष 2016 में सभी मूलभूत सुविधाओं से सम्पन्न, परम्परागत प्राचीन और नवीन पद्धतियों के समन्वय से आधुनिक गुरुकुल पद्धति के बालिका छात्रावास की आधारशिला रखी गई। उन्होंने बताया कि रानी दुर्गावती बालिका छात्रावास सिर्फ एक छात्रावास नहीं है, बल्कि समाज के वंचित और पीड़ितों के सम्पूर्ण विकास का एक महत्त्वपूर्ण अभियान है और साथ ही सामाजिक एवं शैक्षणिक संकल्पों की नई पीढ़ी तैयार करने का एक महत्वपूर्ण अनुष्ठान है।

यहाँ कला, भाषा, साहित्य, शास्त्र और दर्शन के ज्ञान के साथ-साथ जीवन के व्यावहारिक पक्ष, शारीरिक विकास, मानसिक विकास, नैतिक विकास, खेलकूद, चारित्रिक विकास और व्यक्तित्व के सर्वांगीण विकास पर बल देते हुए व्यावसायिक विकास की अहम शिक्षा प्रदान की जाती है | उन्होंने जानकारी दी कि इस गुरुकुल में वनवासी समाज की बेटियाॅं सुशिक्षित, सुसंस्कृत एवं आत्मनिर्भर हो रही हैं और साथ ही बाहरी बुरी शक्तियों के प्रभाव से भी सुरक्षित हैं। इनके अभिभावक हर महीने इनसे मिलते हैं और अपनी बेटियों की प्रगति से उत्साहित होकर लौटते हैं |

कोरोना महामारी से पहले इस छात्रावास में 95 वनवासी लड़कियों ने प्रवेश लिया, जिनमें 16 छात्राऍं दसवीं की परीक्षा में शामिल हुईं और सभी प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण हुईं। पिछले सात वर्षों की अवधि में इस छात्रावास ने शिक्षा, संस्कृति और खेलकूद जैसे क्षेत्रों में नये कीर्तिमान स्थापित किये हैं | वर्तमान में यहाँ 8 पूर्णकालिक और 5 अंशकालिक कर्मी कार्यरत हैं तथा गुरुकुल की समिति के 9 सदस्य स्वैच्छिक रूप से सेवाऍं दे रहे हैं। वनांचल में रानी दुर्गावती बालिका छात्रावास वनवासी बेटियों की प्रतिभा को तराशने और निखारने की अनूठी संकल्पना और बड़े सपने को बखूबी साकार कर रहा है

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