Saturday, June 15, 2024
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समय की मांग है समान नागरिक कानून

समान नागरिक कानून का सामान्य आशय है कि भारत में रहने वाले प्रत्येक नागरिक के लिए समान कानून होना चाहिए, चाहे वह किसी भी धर्म या जाति के क्यों ना हो? समान नागरिक कानून लागू होने से शादी, तलाक ,बच्चा गोद लेना और उत्तराधिकार से जुड़े मामलों में सभी भारतीयों के लिए एक जैसे नियम होंगे।समान नागरिक संहिता एक देश व एक विधान की विचारधारा पर आधारित है। समान नागरिक संहिता के अंतर्गत देश के सभी व्यक्तियों को हर धर्म, जाति ,संप्रदाय और वर्ग के लिए संपूर्ण देश में एक ही कानून है।समान नागरिक कानून का आशय है कि पूरे देश के लिए एक समान कानून के साथ ही सभी धार्मिक समुदायों के लिए विवाह, तलाक ,विरासत और गोद के लिए नियम एक ही होंगे।

देश के प्रधान आदरणीय नरेंद्र मोदी जी समान नागरिक कानून की उपादेयता को लोकतांत्रिक शासन व लोकतंत्र के लिए महत्वपूर्ण बताया है, हालांकि साल 1967 में भारतीय जनता दल (तत्कालीन जनसंघ) ने अपने आम चुनावी घोषणा पत्र में पहली बार ‘ समान नागरिक संहिता’ को सम्मिलित किया था। चुनावी घोषणा – पत्र में कहा गया था कि अगर जनसंघ सत्ता में आती है, तो देश में समान नागरिक संहिता को क्रियान्वित किया जाएगा। भारतीय राजनीति में एक ऐसा दौर आया जब राजनीतिक विचारधारा पर संकट का बादल छा गया और राजनीतिक नेतृत्व को कठिनाइयों का सामना करना पड़ा था। कांग्रेसका बटवारा ,भारत- पाकिस्तान युद्ध, 1971 और आपातकाल का दौर (25 जून,1975) इन सभी के बदलते आयाम में भारतीय जनता दल ने अपने चुनावी घोषणा पत्र में राम मंदिर निर्माण (स्थापना की ओर अग्रसर) है और अनुच्छेद 370( जम्मू- कश्मीर का विशेष प्रावधान )और समान नागरिक कानून (अनुच्छेद 44) को भारतीय जनता दल ने अपने मुख्य चुनावी एजेंडा, भारतीय जनता दल को इन मुद्दों पर जनमत/ लोकमत ने सहयोग दिया और वर्तमान राजनीतिक पाठशाला में भारतीय जनता पार्टी के शीर्ष नेतृत्व, कुशल संगठन, चुनावी पांडित्य के विशेषज्ञ और राजनीति के चाणक्य जैसे अलंकारों से जनता जनसभाओं में भी घोषित किए जा रहे हैं। बाल गंगाधर तिलक ,राष्ट्रपिता महात्मा गांधी, नेताजी सुभाष चंद्र बोस के पश्चात मोदी जी ऐसे राजनीतिक व्यक्तित्व, करिश्माई नेतृत्व और विवेकी- विधिक नेतृत्व हैं जिनको राजनीति में जनता इतनी विश्वास कर रही है ।मोदी जी के कार्यक्रम में लोक संस्तुति/ जन संस्तुति व्यापक होता है।

इसी क्रम में बीते 27 जून ,2023 को ‘ सबसे मजबूत संवाद’ में समान नागरिक संहिता पर विस्तृत तरीके से जनता से संवाद किए थे । भोपाल में एक जन संवाद के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी जी ने कहा कि” एक ही परिवार में दो लोगों के लिए अलग-अलग नियम नहीं हो सकते। ऐसी दोहरी व्यवस्था से परिवार कैसे चल पाएगा ?” मोदी जी का कहना है कि भारतीय जनता दल सबका साथ ,सबका विकास एवं सबका विश्वास पर आधारित लोकतांत्रिक मंत्र पर काम करती है ।भारतीय जनता दल के लिए वर्ष 2024 में “समान नागरिक संहिता बीजेपी का परमाणु बटन” सिद्ध हो रहा हैं, क्योंकि 2014 के आम चुनाव में बहुमत एवं वर्ष 2019का आम चुनाव में बहुमत चुनावी मुद्दे की जीत थी।समान नागरिक संहिता जनसंघ के समय से ही चुनावी मुद्दा रहा है। अनुच्छेद 370 और राम मंदिर के मुद्दे लागू हो चुके हैं। विपक्षी पार्टियों की एकजुटता का संकेत वीतें 23जून को मिला था, लेकिन उनके पास सर्वमान्य मुद्दे का अभाव है ,इसलिए विपक्ष को मोदी जी ने चुनावी रणनीति से रिएक्टिव बना दिया है।

राजनीति में जनमत/ लोकमत के लिए कोई बड़ा मुद्दा चाहिए जो जनता को बूथ तक जाने के लिए उद्वेलित करता हो। राजनीतिक दलों के परंपरागत वोटर को जोड़े रहे एवं तैरते हुए वोटरों (फ्लोटिंग वोटर्स) को आकर्षित कर सकें। समान नागरिक संहिता/ कानून इस लिहाज से एक सर्वोत्तम मुद्दा है, जो दलितों और अल्पसंख्यकों को 2024 में आकर्षित करने में महत्वपूर्ण साधन सिद्ध होगा ।भारतीय जनता दल (तत्कालीन में जनसंघ) सार्वभौमिक रूप से एक देश ,एक विधान एवं एक निशान की बात करती है।

जब देश में समान आपराधिक संहिता सबके लिए समान है तो भारतीय नागरिक संहिता अलग-अलग क्यों होगी? प्रायोगिक स्तर पर गोवा देश का इकलौता राज्य है जहां पर समान नागरिक संहिता लागू है ,और सफल भी है। इधर उत्तराखंड में समान नागरिक संहिता का मसौदा तैयार कर लिया है। वैश्विक स्तर पर आधुनिक और विकसित राज्य समान नागरिक कानून को अपने देश में लागू किए है, जैसे संयुक्त राज्य अमेरिका ,इजराइल, जापान ,फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और यूरोप के कई देशों में समान नागरिक संहिता /कानून लागू है। इस्लामिक देशों की बात करें तो तुर्की को छोड़कर सभी देशों में शरिया कानून है, जो सभी धर्म के लोगों पर समान रूप से लागू होता है।

(लेखक लोकनीति विशेषज्ञ हैं )

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