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  • सीलिंग का क़हर बरपा

    देश की राजधानी दिल्ली में जिस तेज़ी से आबादी बढ़ रही है, उस हिसाब से बुनियादी सुविधाओं को जुटाना कोई आसान काम नहीं है। इस आबादी में देश के अन्य राज्यों से आए लोगों की भी एक बड़ी संख्या है। आबादी को रहने के लिए घर चाहिए, रोज़गार चाहिए, बिजली-पानी चाहिए, शैक्षिक, स्वास्थ्य व परिवहन की सुविधाएं चाहिएं। यानी घर-परिवार के लिए सभी बुनियादी सुविधाएं चाहिएं। जनता को ये सब सुविधाएं मुहैया कराने की ज़िम्मेदारी सरकार की है, प्रशासन की है। इसके लिए एक योजना की ज़रूरत होती है, एक मास्टर प्लान की ज़रूरत होती है। किसी भी शहर के सतत योजनाबद्ध विकास का मार्गदर्शन करने के लिए एक योजना होती है। इस मास्टर प्लान को बनाते वक़्त इस बात का ख़्याल रखा जाता है कि जिस समयावधि के लिए यह बनाया जा रहा है, उस वक़्त शहर की आबादी कितनी होगी और उसकी ज़रूरतें क्या-क्या होंगी। मास्टर प्लान 2021 भी एक ऐसी ही योजना है, जिसके मुताबिक़ दिल्ली को एक ऐसा विश्वस्तरीय शहर बनाना है, जिसमें यहां के बाशिन्दों को तमाम सुविधाएं मुहैया हो सकें।

  • नाउम्मीद स्वामी सानंद, फिर गंगा अनशन की राह पर

    नाउम्मीद स्वामी सानंद, फिर गंगा अनशन की राह पर

    स्वामी श्री ज्ञानस्वरूप सानंद को उम्मीद थी कि भारतीय जनता पार्टी जब केन्द्र की सत्ता में आयेगी, तो उनकी गंगा मांगें पूरी होंगी। अपना पिछला गंगा अनशन, उन्होने इसी आश्वासन पर तोड़ा था। यह आश्वासन तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष श्री राजनाथ सिंह द्वारा आश्वासन दिया गया था। 20 दिसंबर, 2013 को वृंदावन के एक भवन में पुरी के शंकराचार्य स्वामी श्री निश्चलानंद जी ने अपने हाथों से जल पिलाकर आश्वस्त किया था कि राजनाथ जी ने जो कहा है, वह होगा। किंतु स्वामी जी व्यथित हैं कि वह आज तक नहीं हुआ। इसीलिए उन्होने प्रधानमंत्री के नाम एक खुला पत्र लिखा है और उसमें लिखी तीन अपेक्षाओं की पूर्ति न होने पर आमरण अनशन करते हुए देहत्याग के अपने निर्णय से प्रधानमंत्री जी को अवगत कराया है।प्रसिद्ध पानी कार्यकर्ता श्री राजेन्द्र सिंह ने इसे सही समय पर उठाया कदम बताते हुए सभी देश-दुनिया के सभी गंगा प्रेमियों से इसके समर्थन की अपील की है।

  • जीवंत और मजबूत राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण

    जीवंत और मजबूत राष्ट्र के निर्माण में महिलाओं का योगदान महत्वपूर्ण

    हम विश्व में लगातार कई वर्षों से अन्तरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाते आ रहे हैं, महिलाओं के सम्मान के लिए घोषित इस दिन का उद्देश्य सिर्फ महिलाओं के प्रति श्रद्दा और सम्मान बताना है। इसलिए इस दिन को महिलाओं के आध्यात्मिक, शैक्षिक, आर्थिक, राजनीतिक और सामाजिक उपलब्धियों के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। आज अपने समाज में नारी के स्तर को उठाने के लिए सबसे ज्यादा जरूरत है महिला सशक्तिकरण की। महिला सशक्तिकरण का अर्थ है महिलाओं की आध्यात्मिक, शैक्षिक, सामजिक, राजनैतिक और आर्थिक शक्ति में वृध्दि करना, बिना इसके महिला सशक्तिकरण असंभव है। आज हर महिला समाज में धार्मिक रूढ़ियों, पुराने नियम कानून में अपने आप को बंधा पाती है। पर अब वक्त है कि हर महिला तमाम रूढ़ियों से खुद को मुक्त करे। प्रकृति ने औरतों को खूबसूरती ही नहीं, दृढ़ता भी दी है। प्रजनन क्षमता भी सिर्फ उसी को हासिल है।

  • गुजरात में आदिवासी आन्दोलन क्यों?

    असंवैधाानिक एवं गलत आधार पर गैर-आदिवासी को आदिवासी सूची में शामिल किये जाने एवं उन्हें लाभ पहुंचाने की गुजरात की वर्तमान एवं पूर्व सरकारों की नीतियों का विरोध इनदिनों गुजरात में आन्दोलन का रूप ले रहा है। समग्र देश के आदिवासी समुदाय का नेतृत्व करने वाले गुजरात के आदिवासी समुदाय के प्रेरणापुरुष गणि राजेन्द्र विजयजी इस ज्वलंत एवं आदिवासी अस्तित्व एवं अस्मिता के मुद्दे पर सत्याग्रह कर रहे हैं। अनेक कांग्रेसी एवं भाजपा के आदिवासी नेता भी उनके साथ खड़े हैं। गुजरात के आदिवासी जनजाति से जुड़े राठवा समुदाय में उनको आदिवासी न मानने को लेकर गहरा आक्रोश है। इन विकराल होती संघर्ष की स्थितियों पर नियंत्रण नहीं किया गया तो यह न केवल गुजरात सरकार बल्कि केन्द्र सरकार के लिये एक बड़ी चुनौती बन सकता है।

  • विकास परियोजनाओं की गति की तलाश

    विकास परियोजनाओं की गति की तलाश

    प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुनियादी ढांचे से संबंधित आवश्यक एवं विकासमूलक विभिन्न परियोजनाओं में हो रहे अनावश्यक विलम्ब पर चिन्ता व्यक्त की।

  • नीरव मोदी को नीरव मोदी बनाने वाला कौन है?

    नीरव मोदी को नीरव मोदी बनाने वाला कौन है?

    एक तरफ प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी देश में भ्रष्टाचार खत्म करने की बात कर रहे हैं तो दूसरी तरफ देश के एक प्रमुख बैंक में 11400 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया है।

  • पूर्ण विकसित भारत बनाने की चुनौतियां

    पूर्ण विकसित भारत बनाने की चुनौतियां

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का नया भारत निर्मित हो रहा है। मोदी के शासनकाल में यह संकेत बार-बार मिलता रहा है कि हम विकसित हो रहे हैं, हम दुनिया का नेतृत्व करने की पात्रता प्राप्त कर रहे हैं, हम आर्थिक महाशक्ति बन रहे हैं, दुनिया के बड़े राष्ट्र हमसे व्यापार करने को उत्सुक हंै, महानगरों की बढ़ती रौनक, गांवों का विकास, स्मार्ट सिटी, कस्बों, बाजारों का विस्तार अबाध गति से हो रहा है। भारत नई टेक्नोलॉजी का एक बड़ा उपभोक्ता एवं बाजार बनकर उभरा है-ये घटनाएं एवं संकेत शुभ हैं। आज भारतीय समाज आधुनिकता के दौर से गुजर रहा है। लेकिन इन रोशनियों के बीच व्याप्त घनघोर अंधेरों पर नियंत्रण करके ही भारत को पूर्ण विकसित राष्ट्र बना सकेंगे।

  • संसद में तकरार नहीं, संवाद होना चाहिए

    संसद में तकरार नहीं, संवाद होना चाहिए

    प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का एक राष्ट्रीय यौद्धा का आक्रामक स्वरूप राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद ज्ञापन पर संसद में हुई चर्चा के दौरान देखने को मिला। अक्सर उनके इस तरह के आक्रामक एवं जोशीले स्वर चुनावी सभाओं में होने वाले भाषणों में सुनते और देखते मिलते रहे हैं, पहली बार उनका संसद के पटल पर ऐसा संवेदनशील एवं जीवंत स्वरूप देखने को मिला, जिसमें उन्होंने विपक्ष विशेषतः कांग्रेस के आरोपों का तथ्यपरक जबाव दिया। शायद यह भारत के संसदीय इतिहास का पहला अवसर है जब कांग्रेस को न केवल नेहरु-गांधी परिवार को लेकर तीखे प्रहार झेलने पडे बल्कि कांग्रेस के़ शासन की विफलताओं के इतिहास से भी रू-ब-रू होना पड़ा। उसने जिस तरह की अलोकतांत्रिक स्थिति खड़ी की और इस स्थिति को भारतीय लोकतंत्र के लिये किसी भी कोण से उचित नहीं कहा जा सकता। संसद में तकरार नहीं,संवाद होना चाहिए।

  • दिल्ली सरकार में भ्रष्टाचार के दंश

    दिल्ली सरकार में भ्रष्टाचार के दंश

    देश में भ्रष्टाचार पर जब भी चर्चा होती है तो राजनीति को निशाना बनाया जाता है। आजादी के सत्तर साल बीत जाने के बाद भी भ्रष्टाचार को शक्तिशाली बनाने में राजनेताओं की महत्वपूर्ण भूमिका का होना न केवल दुर्भाग्यपूर्ण है बल्कि भारत की राजनीति पर एक बदनुमा दाग है। इस दाग को भ्रष्टाचार को समाप्त करने के नारे को बुलन्द करते हुए सत्ता पर काबिज हुए अरविन्द केजरीवाल एवं उनकी सरकार हर दिन किसी नये घोटाले एवं भ्रष्टाचार के संगीन मामले को लेकर और गहरा कर रही हैं। दिल्ली सरकार के मंत्री सत्येंद्र जैन अनेक घोटाले एवं भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त पाये गये हैं और हर बार केजरीवाल उनकी रक्षा कर उन्हें सत्ता में कायम किये हुए हैं। जैन का एक और मामला सीबीआई की जांच के दौरान सामने आया है जिसने अनेक सवाल खड़े कर दिये हैं। मुख्य सवाल तो यहां सतेन्द्र जैन जैसे राजनेताओं पर विश्वास करने का नहीं है, सवाल यहां ऐसे राजनेताओं की अपने कर्तव्य परायणता और पारदर्शिता का है। कब तक हम भ्रष्ट नेताओं को सहते रहेंगे और कब तक भ्रष्ट नेता देश के चरित्र को धुंधलातेे रहेंगे।

  • नमामि गंगे या नाकामी गंगे

    नमामि गंगे या नाकामी गंगे

    अब यह एक स्थापित तथ्य है कि यदि गंगाजल में वर्षों रखने के बाद भी खराब न होने का विशेष रासायनिक गुण है, तो इसकी वजह है इसमें पाये जाने वाली एक अनन्य रचना। इस रचना को हम सभी 'बैक्टीरियोफाॅज' के नाम से जानते हैं। बैक्टीरियोफाॅज, हिमालय में जन्मा एक ऐसा विचित्र ढांचा है कि जो न सांस लेता है, न भोजन करता है और न ही अपनी किसी प्रतिकृति का निर्माण करता है। बैक्टीरियोफाॅज, अपने मेजबान में घुसकर क्रिया करता है और उसकी यह नायाब मेजबान है, गंगा की सिल्ट। गंगा मूल की उत्कृष्ट किस्म की सिल्ट में बैक्टीरिया को नाश करने का खास गुण है। गंगा की सिल्ट का यह गुण भी खास है कि इसके कारण, गंगाजल में से काॅपर और क्रोमियम स्त्रावित होकर अलग हो जाते हैं।।

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