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तुफैल चतुर्वेदी
 

  • फैज़ अहमद, जावेद अख्तरों और मुनव्वर राणाओं से बचिये

    फैज़ अहमद, जावेद अख्तरों और मुनव्वर राणाओं से बचिये

    ये उस नज़्म के हिस्से हैं जिसे कानपुर आईआईटी के एक मुस्लिम छात्र ने सीएए के विरोध में निकले मार्च में गाया था।

  • सकल जगत में खालसा पंथ गाजे

    सकल जगत में खालसा पंथ गाजे

    सामान्य व्यक्ति और महापुरुष में एक बडा अंतर यह भी है कि महापुरुष की दृष्टि वर्तमान के साथ-साथ अतीत और भविष्य पर भी भरपूर सजगता के साथ होती है। वस्तुतः अतीत की घटनाओं की सामूहिक परिणति ही तो वर्तमान है और वर्तमान के कार्यकलाप ही तो भविष्य तय करते हैं।

  • इस्लाम के बंदे इसलिए दुःखी हैं कि वो आपको सुखी नहीं देख सकते

    इस्लाम के बंदे इसलिए दुःखी हैं कि वो आपको सुखी नहीं देख सकते

    स्वयं और अन्य बहुत से मानवतावादी खिन्न हैं कि हमारे मुस्लिम भाई खुश नहीं हैं. मैं इनके लिए मनुष्यता में प्रबल विश्वास रखने के नाते दुखी हूँ और आंसुओं में डूबा हुआ हूँ। वो तो नगर के सौभाग्य से मेरी आँखों के ग्लैंड्स ख़राब हैं इसलिये आंसू अंदर-अंदर बह रहे हैं अन्यथा शहर में बाढ़ आ जाती।

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