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बेटे के हाथ नहीं रहे तो पिता ने बनवा ली बगैर हैंडल वाली साइकिल

अब्दुल कादिर रतलाम में रहते हैं। उनके पिता हुसैन इंदौरी ने बताया, 'अब्दुल कादिर को साइकिल चलाने का बेहद शौक था। साल भर पहले ही उसे नई साइकिल ला कर दी थी, एक-दो बार ही साइकिल चलाई थी कि भोपाल में करंट लगने के कारण हाथ चले गए। हाथ गंवाने के बाद अकसर उसे साइकिल चलाने का मन होता था। दूसरे बच्चों को साइकिल चलाते हुए देखता था तो रोता था। उसके इस शौक को पूरा करने के लिए बाजार में ऐसी साइकिल ढूंढी जो बिना हाथ के चलाई जा सके, लेकिन नहीं मिली। फिर इंटरनेट पर सर्च किया तो विदेशों में इस तरह के मॉडल दिखे। रतलाम के ही एक कारिगर काे ऐसी साइकिल बनाने का आइडिया दिया तो वह साइकिल बनवाने के लिए तैयार हो गया। हमने काम शुरू किया। बैलेंस का गणित बिठाया। यह भी ध्यान रखा कि साइकिल मुड़ते समय बैलेंस न बिगड़े। चार से पांच बार ट्रायल किया और दस दिन में तीन पहियों वाली साइकिल तैयार कर ली। अब अब्दुल कादिर खुद साइकिल चलाता है।'

हुसैन इंदौरी बताते हैं, 'साइकिल का ज्यादातर काम कारिगर सरफराज शैख ने ही किया। मेरा काम अाइडिया देने और बैलेंस बनवाने का रहा। जब हम घर पर साइकिल तैयार कर रहे थे तो अब्दुल कादिर भी हमें सजेशन देता था। अब्दुल की सेफ्टी के लिए हमने साइकिल में सीट बेल्ट भी लगाया। वहीं साइकिल में पैर से ब्रेक लगा सकते हैं।'

हुसैन इंदौरी ने बताया, "बेटा अब्दुल कादिर बीते साल 20 मई को राजधानी की हाउसिंग बोर्ड कॉलोनी में रहने वाले रिश्तेदार के यहां आया था। 24 मई की दोपहर वह मकान की छत पर खेल रहा था। तभी, छत के ऊपर से निकली हाइटेंशन लाइन को उसने पकड़ लिया था। हादसे में अब्दुल के दोनों हाथ झुलस गए थे। हादसे के बाद भोपाल के अस्पतालों में कराए इलाज से आराम नहीं मिलने पर, उसे मुंबई के मासीना हॉस्पिटल में भर्ती कराया था। इलाज के दौरान झुलसे हुए हाथों में संक्रमण बढ़ने पर डॉक्टरों ने उसके दोनों हाथ कंधे से काट दिए थे।"

 
हुसैन इंदौरी बताते हैं, "अब्दुल कादिर के इलाज में 8 से 9 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। कृत्रिम हाथ लगवाने का खर्च अब 13 लाख रुपए आ रहा है। इसलिए पिछले दिनों मुख्य सचिव से मिलकर मदद के लिए गुजारिश की थी। मुख्य सचिव एंटोनी डिसा को बेटे के कटे हाथों के स्थान पर आर्टिफिशियल इलेक्‍ट्रॉनिक हाथ लगवाने पर 13.5 लाख रुपए खर्च आने का दिल्ली के निजी अस्पताल का कोटेशन दिया था। इस पर उन्होंने बेटे को सरकारी खर्च पर आर्टिफिशियल इलेक्‍ट्रॉनिक हाथ लगवाने का आश्वासन दिया है। हालांकि इस बात को दो महीने बीत चुके हैं लेकिन अब तक प्रक्रिया आगे नहीं बढ़ सकी है।''

साभार- दैनिक भास्कर से 

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