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‘बम्बई में का बा’ गीत के गीतकार डॉ. सागर पर परिवर्तन पत्रिका के विशेषांक का प्रकाशन

पॉन्डिचेरी विश्वविद्यालय से निकलने वाली त्रैमासिक ई- पत्रिका का विशेषांक प्रकाशित हुआ है। परिवर्तन पत्रिका का यह अंक भोजपुरी और हिंदी सिनेमा के चर्चित युवा गीतकार डॉ. सागर पर केंद्रित है।

पिछले वर्ष कोरोना की वजह से लगे देशव्यापी लॉकडाउन में लाखों प्रवासी मजदूर महानगरों से अपने घर पैदल ही जाने के लिए मजबूर हुए थे। इसमे हुई अव्यवस्था के कारण हजारों प्रवासियों को अपनी जान से हाथ धोना पड़ा था। उसी समय डॉ सागर ने उनकी पीड़ा को महसूस करते हुए एक गीत लिखा था- ‘बम्बई में का बा’। गीत के निर्देशक थे जाने-माने फ़िल्म निर्देशक अभिनव सिन्हा और आवाज दी थी अभिनेता मनोज बाजपेयी ने। यह गीत इतना फेमस हुआ कि बिहार की युवा गायिका नेहा सिंह राठौर ने इसी को आधार बनाकर एक गीत लिखा और गाया- ‘बिहार में का बा’। बिहार विधानसभा चुनाव में यह गीत काफी चर्चा में रहा।

डॉ. सागर का जीवन भी संघर्षों से भरा पड़ा है। मूल रूप से बलिया के रहने वाले डॉ. सागर एक गरीब किसान परिवार से आते हैं। लेकिन परिंदों को परवाज करने से भला कौन रोक सकता है; सागर भी गांव से निकलकर देश की नम्बर एक यूनिवर्सिटी जेनयू से डॉक्टरेट की डिग्री प्राप्त किये और आज बॉलीवुड में अपनी पहचान बना चुके हैं। परिवर्तन पत्रिका के इस विशेषांक में डॉ. सागर के इन्ही संघर्षों और उनके गीतों के बारे में विस्तृत रूप से पढ़ा जा सकता है। पत्रिका के संपादक महेश सिंह वर्तमान में गांडेय प्रखण्ड, गिरिडीह के फुलची हाइस्कूल में हिंदी के शिक्षक हैं। विशेषांक का पीडीएफ पत्रिका की वेबसाइट www.parivartanpatrika.in से निःशुल्क डाउनलोड किया जा सकता है।

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