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ये अपने जन्म दिन पर मुस्कराहट बाँटते हैं

इन्दौर। अपना और अपने करीबियों का जन्मदिन हम सभी मनाते हैं, उन्हें तोहफे देते हैं और उनके चेहरे पर मुस्कुराहट लाने का हर प्रयास करते हैं। शहर के दो युवा समाजसेवी युगल का भी हर जन्मदिन का यही सिलसिला होता था, लेकिन एक दिन में यह सबकुछ बदल गया। फाइव स्टार होटल में होने वाली पार्टी गरीब बच्चों के लिए नि:शुल्क सर्जरी शिविर लगाने में तब्दील हो गई। ये जोड़ी है युवा समाजसेवी जय सिंह और टीना जैन की। जय सिंह बताते हैं कि वे धार के पास एक छोटे से गांव टांडा के रहने वाले हैं।

एक बार जब वे अपनी पत्नी (टीना) के साथ वहां गए तो टीना ने एक बच्चा देखा, जिसकी नाक नहीं थी। इसके बाद हम लोग तो इंदौर लौट आए, लेकिन उस तस्वीर को नहीं भुला पाए। कुछ दिनों बाद ही टीना का जन्मदिन था और हम ग्रैंड सेलिब्रेशन प्लान कर रहे थे।

इस दौरान मेरी भारतीय जैन संगठन के जरिए डॉ. सुप्रिया दीक्षित से मुलाकात हुई और उन्होंने बताया कि वे अमेरिका के विशेषज्ञ चिकित्सकों के जरिए गरीब बच्चों की नि:शुल्क प्लास्टिक सर्जरी कराना चाहती हैं, लेकिन मदद नहीं मिल रही। अचानक से हम दोनों को उस बच्चे की याद आई और हमने फैसला किया अब जन्मदिन पर कोई पार्टी करने के बजाए इन बच्चों के चेहरों पर मुस्कान लाएंगे। सोमवार को जय सिंह और टीना जैन ने इस बच्चों के साथ ही जन्मदिन मनाया। टीना जैन ने कहा कि हम चाहते हैं कि आर्थिक रूप से सक्षम लोग इस तरह अपना जन्मदिन मनाएं तो समाज में बड़े बदलाव लाए जा सकते हैं।

6 दिनों में 200 प्लास्टिक सर्जरी

शिविर में 6 दिनों में 200 बच्चों की सर्जरी की गई। सर्जरी के बाद भी 8 दिनों तक की दवाई का खर्च जैन दंपती ही वहन करते हैं। हर सर्जरी में कम से कम एक लाख रुपए की लागत आती है, लेकिन समग्र प्रयासों से इसे कम किया जाता है। इस साल शिविर के लिए अमेरिका से डॉ. मनोज अब्राहम, डॉ. रेगिना रोड्मन, डॉ. मैथ्यू जॉनसन, डॉ. रयान विंटर्स आदि जानेमाने विशेषज्ञ आए हैं। पिछले साल भी शिविर में करीब 150 लोगों की नि:शुल्क सर्जरी हुई थी।


पिता की परंपरा बरकरार रखने हर साल आती हैं स्वदेश

प्रसिद्ध प्लास्टिक सर्जन डॉ. शरदकुमार दीक्षित सन् 1968 से 2011 तक देश के विभिन्न् शहरों में प्लास्टिक सर्जरी के नि:शुल्क शिविर लगा रहे थे। 2011 में उनका निधन हो गया, लेकिन उनकी यह पहल उनकी बेटी डॉ. सुप्रिया दीक्षित ने बदस्तूर जारी रखी है। डॉ. सुप्रिया हर साल दो महीने के लिए अमेरिका से विशेषज्ञों की टीम लेकर आती हैं।

डॉ. सुप्रिया ने बताया कि मैं किसी भी हाल में अपने पिता के शुरू किए इस नेक काम को जारी रखना चाहती थी। एक व्यक्ति के जाने का नुकसान इतने अधिक जरूरतमंद लोगों को नहीं होना चाहिए, इसलिए फिर से लोगों को साथ जोड़ा और ये सिलसिला शुरू हुआ। मैं बचपन से इंडिया आ रही हूं और यहां आकर बिल्कुल अलग नहीं लगता, जबकि मेरी परवरिश अमेरिका में हुई। मैं अमेरिकन सिटीजंस का कल्चर और माइंड सेट भी समझती हूं इसलिए वहां के डॉक्टर्स को तैयार कर सकी।

अगले दस साल यूं ही मनाएंगे जन्मदिन

जय सिंह ने बताया कि अमेरिकी चिकित्सकों से नियमों के तहत वीजा के समय पूछा गया था कि वे कितने साल तक यहां चिकित्सकीय सेवाएं देने के लिए आएंगे। बीजेएस के राष्ट्रीय वाइस प्रेसीडेंट वीरेंद्र जैन और रेखा जैन भी इस अभियान से दिल से जुड़े थे। उनसे चर्चा हुई और मैंने उस समय मैंने शर्त रखी कि यदि शिविर का समय हमेशा यही रहेगा तो आने वाले 10 साल तक शिविर में बच्चों की सर्जरी का खर्च उठाऊंगा।

इस बात के लिए डॉ. सुप्रिया भी राजी हो गईं। अब आने वाले सालों में इसे और भी वृहद स्तर पर लेकर जाएंगे। अब अमेरिका से ऐसे विशेषज्ञों को भारत लेकर आएंगे जो बच्चों के कान न होने या पूरे बहरेपन तक का इलाज करने में सक्षम हैं। अमेरिका में इस सर्जरी का खर्च 25 लाख रुपए तक आता है, लेकिन हम यह नि:शुल्क उपलब्ध कराएंगे।

साभार- https://naidunia.jagran.com/ से



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