Sunday, June 16, 2024
spot_img
Homeजियो तो ऐसे जियोभवानी शंकर वर्मा : संघर्ष के साथ साहित्य सृजन

भवानी शंकर वर्मा : संघर्ष के साथ साहित्य सृजन

हिन्दी व हाड़ौती भाषा में कविता, गीत, हिन्दी ग़ज़ल, मुक्तक आदि विधाओं के साहित्यकार साहित्यकार नौकरी की जिद्दोजहद कारने के साथ – साथ साहित्य सृजन में भी लगे हैं। इनसे मेरी मुलाकात रविवार 3 सितंबर 2023 को मदर टेरेसा स्कूल,कोटा में आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान हुई। इन्होंने बताया कि आजकल ये कोटा में रहकर द्वितीय श्रेणी अध्यापक की नौकरी के लिए तैयारी कर रहे हैं। नौकरी मिल जाए तो जीवन की लाइन पटरी पर चल पड़े। आप सहज और सरल हैं और सादगीपूर्ण जीवन व्यतीत करते हैं। गुरुजनों के प्रति पूर्ण श्रद्धा है। गांव और गांव की संस्कृति से अटूट प्रेम है।

आपने बताया की पिछले 11 वर्षों से पढ़ाई के साथ – साथ कविता, ग़ज़ल आदि लिखने का क्रम भी चलता रहता हैं। आप श्रृंगार रस के साथ – साथ बेटियों पर कविताएं लिखते हैं।इनकी एक ग़ज़ल की कुछ पंक्तियां देखिए…
शेर सारे रूहानी हो जाते है ग़ज़ल में मेरी
नाम जब तुम्हारा आता है ग़ज़ल में मेरी ।
तुम्ही से शुरू है तुम्ही पे खतम है ग़ज़ल मेरी तुम्ही मतला हो तुम्ही मता हो ग़ज़ल में मेरी ।।
इत्र से महकते है शेर सारे जब मालूम ये होता है कि तुम ही हो ग़ज़ल में मेरी ।।
दगा बेवफाई ख़ता को जगह न दी जिन्दगी में बस प्यार मोहब्बत इश्क है ग़ज़ल में मेरी ।।
मुस्कुराती है ग़ज़लें अब ये जानकर के जिन्दा है ग़ज़ल आज भी ग़ज़ल में मेरी ।।
तुम्हारे लिये लिखा गया हर शेर अलग से चमकता है ग़ज़ल में मेरी ।।

आप मुक्तक लिखने में भी अपना दखल रखते हैं। कुछ मुक्तक इस प्रकार हैं….
1. मन के उपवन में विचरण है /भावनाओं का आवरण है /अहसासों का पर्यावरण है /बिन पायल, पायल की खनक है/ प्रेम प्रेम, तुमसे आमरण है ।
2. सुदूर है पर हम इतना भी दूर नहीं /आगमन आदित्य का इतना भी दूर नहीं/ अंधकार का साया छाया बहुत है मगर/ धैर्य रखो कि निर्माता इतना भी क्रूर नहीं ।
करीब एक सो से अधिक रचनाएं लिखने पर अभी तक कोई पुस्तक नहीं छपने का इन्हें मलाल जरूर है पर कहते हैं, पहले कोई नौकरी मिल जाए तो प्रस्तकें भी आ जायेंगी। ये झालावाड़ में ही आयोजित गोष्ठियों और कवि सम्मेलनों में कविता पाठ करते हैं। आप समसामयिक रचनाओं का लेखन भी करते हैं। इनकी रचनाएं विभिन्न समाचार पत्रों और साहित्यिक पत्र पत्रिकाओं में निरंतर प्रकाशित होती हैं। इनकी रचनाएं कविताओं व ग़ज़लों का प्रसारण प्रसार भारती के आकाशवाणी के झालावाड़ केन्द्र से अनेक बार किया जा चुका है। नवोदित सृजनकार अपने अग्रज रचनाकारों से निरंतर मार्गदर्शन लेते रहते हैं।

सम्मान
इनको श्री कर्मयोगी सेवा संस्थान कोटा की ओर से श्री कर्मयोगी साहित्य रत्न सम्मान,
अनेक काव्य गोष्ठियों में और महाविद्यालयी शिक्षा में अनेक संगोष्ठियों व कार्यक्रमों में प्रमाण पत्र व सम्मान से सम्मानित किया गया है।
परिचय
नवोदित साहित्यकार भवानी शंकर वर्मा का जन्म झालावाड़ जिले के ग्राम गोलाना में पिता रामकरण रेगर और माता जानकी बाई के परिवार में 10 अगस्त 1998 को हुआ। इन्होंने
कोटा विश्वविद्यालय, कोटा से हिंदी साहित्य में स्नातकोत्तर और बी.एड.की शिक्षा प्राप्त की।
ये अखिल भारतीय साहित्य परिषद् राजस्थान इकाई झालावाड़ के और राजकीय हरिश्चंद्र सार्वजनिक जिला पुस्तकालय झालावाड़ के
आजीवन सदस्य हैं। आप खण्डिया काॅलोनी, झालावाड़ में निवास करते हैं।
सम्पर्क मोबाइल – 7073716191
——-
डॉ.प्रभात कुमार सिंघल
लेखक एवम् पत्रकार, कोटा

image_print

एक निवेदन

ये साईट भारतीय जीवन मूल्यों और संस्कृति को समर्पित है। हिंदी के विद्वान लेखक अपने शोधपूर्ण लेखों से इसे समृध्द करते हैं। जिन विषयों पर देश का मैन लाईन मीडिया मौन रहता है, हम उन मुद्दों को देश के सामने लाते हैं। इस साईट के संचालन में हमारा कोई आर्थिक व कारोबारी आधार नहीं है। ये साईट भारतीयता की सोच रखने वाले स्नेही जनों के सहयोग से चल रही है। यदि आप अपनी ओर से कोई सहयोग देना चाहें तो आपका स्वागत है। आपका छोटा सा सहयोग भी हमें इस साईट को और समृध्द करने और भारतीय जीवन मूल्यों को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए प्रेरित करेगा।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

लोकप्रिय

उपभोक्ता मंच

- Advertisment -

वार त्यौहार