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ब्राजील के फिल्म निर्माता रोड्रिगो डी ओलिवेरा ‘द फर्स्ट फॉलन’ पहले नायकों- एलजीबीटीक्यू समुदाय- के गैर-दस्‍तावेजी इतिहास की झलक

द फर्स्ट फॉलन मेरे उन पूर्वजों के लिए एक श्रद्धांजलि है जो एलजीबीटीक्यू समुदाय से थे और जो 1983 में ब्राजील में एड्स महामारी की पहली लहर के शिकार हुए थे। फिल्म के निर्देशक रोड्रिगो डी ओलिवेरा ने यह बात कही। यह फिल्म उस समय के एक अज्ञात वायरस एड्स वायरस के खिलाफ संघर्ष के गैर-दस्‍तावेजी इतिहास का पता लगाती है। साथ ही यह 1980 के दशक में ब्राजील में यौन अल्पसंख्यकों द्वारा झेली गई पीड़ा और भेदभाव की अनकही कहानियां दुनिया के सामने लाने का एक प्रयास है। उन्होंने यह भी कहा कि ‘यह अतीत का एक चित्र है जो काफी पुराना है लेकिन अब भी काफी प्रासंगिक है।’

द फर्स्ट फॉलन के बारे में अपने दृष्टिकोण को साझा करते हुए रोड्रिगो डी ओलिवेरा ने कहा, ‘आधिकारिक इतिहास हमारे बारे में परवाह नहीं करता है इसलिए हम अपने इतिहासकार के रूप में खुद काम कर रहे हैं। यदि हम अपने जीवन का दस्तावेज तैयार नहीं करते हैं तो उसे कोई नहीं करेगा।’ यूरोप और पश्चिम द्वारा निर्धारित धारणाओं का विरोध करने की आवश्यकता पर बल देते हुए ब्राजील के फिल्म निर्माता ने कहा, ‘यह समझना हमारी कल्पना से परे है कि ब्राजील में एचआईवी के साथ रहने वाले समलैंगिक पुरुषों या ट्रांससेक्सुअल महिलाओं का जीवन कैसा रहा होगा जब 1983 इस वायरस का नाम तक मालूम नहीं था।’

ओलिवेरा ने कहा, ‘स्वयं एक समलैंगिक पुरुष होने के नाते मुझे लगता है कि हरेक एलजीबीटीक्‍यूआईए व्यक्ति की पहचान एड्स के विचार से निर्धारित होती है क्योंकि आज वे जिस पूर्वाग्रह और समलैंगिकता से पीड़ित हैं उसकी जड़ें उस त्रासदी में काफी गहरी हो चुकी हैं। उस विषय ने मुझे हमेशा प्रेरित किया है।’ उन्‍होंने कहा कि मैं हाशिए के लोगों को आवाज देना चाहता हूं। यदि हम उनके दुखों के इतिहास का दस्तावेजीकरण नहीं करेंगे तो उसे कोई और नहीं करेगा।

उस त्रासदी में मारे गए एलजीबीटीक्यू समुदाय को पहचानने और अनुमोदित करने में प्रणाली की उदासीनता पर ओलिवेरा ने कहा, ‘लोग 1983 से एक ऐसे वायरस के कारण मर रहे थे जिसका कोई नाम नहीं था लेकिन उन्होंने मौत की गिनती 1985 के बाद शुरू की थी। मुझे स्पष्ट तौर पर याद है कि जब मैं अपनी युवावस्‍था में क्लब गया था तो वहां 30 साल से ऊपर के लोग नहीं थे क्योंकि वे सभी मर चुके थे।’

ओलिवेरा ने कहा कि कैसे उनकी टीम ने अपने समुदाय के लोगों को कास्ट करने के लिए एक सजग प्रयास किया। उन्‍होंने ने कहा, “हम न केवल एलजीबीटीक्‍यूआईए के बारे में बल्कि एड्स के साथ जी रहे हमारे समुदाय के लोगों के बारे में एक फिल्म बनाने के लिए सजग थे। बहुत सारे समलैंगिक अभिनेताओं और ट्रांस-अभिनेत्रियों ने इन पात्रों को चित्रित करने में दिलचस्‍पी दिखाई थी।’

‘द फर्स्ट फॉलन’ का जर्मनी के मैनहेम- हीडलबर्ग इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2021 में वर्ल्ड प्रीमियर हुआ था।’ ओलिवेरा ने कहा कि फिल्म का स्वागत जिस उत्‍साह के साथ किया गया वह अचंभित करने वाला था। उन्‍होंने कहा, ‘जर्मन ठंडे होते हैं और हमारी फिल्म गर्म है। कुछ लोग रो भी रहे थे। हो सकता है कि फिल्म एक ऐसा संबंध स्थापित करने में सफल रही हो जो सीमाओं से परे हो।’

ओलिवेरा ने यह भी कहा कि वह अपनी फिल्म का एक भारतीय संस्करण देखना चाहते हैं क्योंकि वैश्विक महामारी दुनिया के विभिन्न हिस्सों को अलग-अलग तरीकों से प्रभावित करती है। उन्‍होंने कहा, ‘विभिन्न देश एड्स वैश्विक महामारी से किस प्रकार निपटते हैं उसका इसमें खुलासा नहीं किया गया है।’

आईएफएफआई में इस फिल्म के स्वागत पर खुशी जताते हुए ओलिवेरा ने कहा, ‘यह देखकर खुशी हुई कि यह फिल्म कितनी लोकप्रिय हो गई है क्योंकि इसे पैक्ड हाउस में दिखाया गया था। इसका अद्भुत अनुभव मिला।’

‘द फर्स्ट फॉलन’ के बारे में

ब्राजील के एक छोटे से शहर में 1983 के आसपास एलजीबीटीक्‍यूआईए+ पुरुषों और महिलाओं का एक समूह नए साल का जश्न मनाता है और उसे वायरस के बारे में कोई जानकारी नहीं होती है। जीवविज्ञानी सुजानो जानता है कि कुछ भयानक चीज उसके शरीर में उथल-पुथल मचा रही है। अपने भविष्य को लेकर अनिश्चित और जानकारी के अभाव में बेताब सुजानो ट्रांससेक्सुअल कलाकार रोज और वीडियो-निर्माता हम्बर्टो के पास पहुंचता है। वे दोनों समान रूप से बीमार हैं। साथ मिलकर वे एड्स महामारी की पहली लहर से बचने की कोशिश करेंगे।

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