Friday, June 21, 2024
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छत्तीसगढ़ में रामकथा का प्रभाव

छत्तीसगढ में श्रीरामचरित मानस का अखंड पाठ करने की बहुत पुरानी परंपरा है. उसी परंपरा को निभाते हुए 28 जून सुबह से रायपुर में हमारी माता, रायपुर की पूर्व विधायक रजनी ताई उपासने के घर जब अखंड मानस शुरू हुआ तो शाम को एक अनोखी बात हुई. एक युवती हमारे घर पहुंची, उसने पत्नी से पूछा कि यह रामायण पाठ कहां हो रहा है? क्या आपके घर में? मानस पाठ ऊपर की मंजिल पर हो रहा था और एक लाउडस्पीकर दिन में सबसे ऊपर की छत पर लगा था जिसकी आवाज घर के सामने वाली व्यस्ततम सड़क पर भारी ट्रैफिक के शोर में भी संभवतः सुदूर जा रही थी. वह लड़की करीब एक किमी दूर स्थित अपने गर्ल्स होस्टल से उस आवाज का पीछा करते-करते हमारे घर पहुंची थी.

वह युवती शहर के एक बडे सरकारी अस्पताल में क्लिनिकल रिसर्चर है और उनका परिवार नागपुर में बसे हजारों उत्तर भारतीयों में से एक है. उसने बताया कि नागपुर में उनकी बड़ी मानस मंडली है. जब वह ड्यूटी से लौटी तो मानस की चौपाइयों की ध्वनि उसके कानों में पड़ी. उसने मेरी पत्नी से कहा कि इतना कर्णप्रिय गायन हो रहा था कि वह स्वयं को रोक नहीं पाई! पत्नी ने जब कहा कि अखंड रामचरितमानस यहीं, ऊपर की मंजिल पर हो रहा है तो उसने पूछा कि क्या वह वहां जा सकती है?

पत्नी ने उससे कहा, श्रीराम की कथा का पाठ है, उसमें बैठने की अनुमति नहीं लेनी पड़ती. वह ऊपर आई और पूरे एक घंटे विशुद्ध मानस शैली में उसने मन:पूर्वक मानस पाठ किया. मंडली के सदस्य उसके विशुद्ध उच्चारण, मधुर स्वर व समय-समय पर पाठ की शैली बदलने की उसकी कला से विस्मय में थे. गोस्वामी तुलसीदास ने भक्तिभाव से इतनी विस्तार से, रोचक, संगीतबद्ध की सकने वाली राम कथा लिखी है कि उसके सुमधुर गायन को सुनकर कोई भी उसकी ओर खींचा चला आता है. छत्तीसगढ़ में जब कहीं कोई मानस पाठ स्पर्धा होती है तो मानस मंडलियां बिना न्यौते के पहुंच जाती हैं.

राज्य में हजारों मानस गायन मंडलियां हैं जिनमें से अनेक को राज्य सरकार से मदद भी मिलती है। आखिर यह राज्य प्रभु श्रीराम के वनगमन का मार्ग है जिसे राज्य-केंद्र सरकारें ‘राम वनपथगमन’ पर्यटन सर्किट के रूप में विकसित कर रही हैं. प्रभु श्रीराम ने वनवास में जिस दंडकारण्य में अधिकांश समय बिताया और जिसका महर्षि वाल्मीकि व गोस्वामी तुलसीदास ने उल्लेख किया है, उसका अधिकतर हिस्सा छत्तीसगढ़ में है. राज्य में श्रीराम से जुडे नौ स्थान हैं; राजधानी रायपुर के पास ही माता कौशल्या का जन्मस्थान है. छत्तीसगढ़ पुराने कोसल साम्राज्य का भाग रहा है. अभी राज्य सरकार ने रायगढ़ में ‘अरण्य कांड’ थीम पर मानस गायन की अंतरराष्ट्रीय स्पर्धा की थी और विजेताओं को भारी भरकम पुरस्कार दिए थे. मानस पाठ छत्तीसगढ़ के जनजीवन का अभिन्न अंग है.

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