Saturday, July 13, 2024
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अखण्ड भारत की कल्पना और हिन्दुओं की घटती आबादी

जब अखण्ड भारत की कल्पना होती हैं तब यह चित्र सामने आता हैं। तब क्या आप मानेंगे की घोर,ग़र्ज़ना और भारी सैनिक बल के साथ आये लोग विदेशी थे?

सवाल मुहम्मद घोरी, महमूद ग़ज़नी या फ़रग़ना घाटी से आये बाबर का नही हैं, सवाल आबादी का हैं। आज इस पूरे क्षेत्र की आबादी 150 करोड़ के आसपास हैं। अगर हिन्दू धर्म इस सम्पूर्ण क्षेत्र में होता तो आबादी होती 150 करोड़, पर आज आप 90 से 95 करोड़ हैं यानी 60 से 65% हिन्दू बसते हैं।

दुनियां की इस सबसे ज्यादा आबादी वाले क्षेत्र में ईसाई मिशिनरी और इस्लामी तबलीग दोनों ही मतांतरण में सक्रिय है, आज भी जिस भारत के हिस्से को आप हिन्दुस्थान कहते हैं उस हिन्दुस्तान के किसी भी थाणे में 2 से 4 हिन्दू लड़की के गैर हिन्दू युवक के साथ जाने की बात न हो यह असम्भव हैं। आपके तीर्थ गंगासागर हो या हरिद्वार, पत्थनमिट्ठा का सबरीमाला हो या फैजाबाद से घिरा अयोध्या कभी भी गैर हिंदुओं के द्वारा घेरे जा सकते हैं। हिन्दुतान में ही 600 में से 100 डिस्ट्रिक्ट हिन्दू बहुल नही हैं।

ऐसा पहली बार भारत में नही हुआ हैं की हिन्दू इतने घटे हो, एक बार पहले भी ऐसा हुआ था उस समय सम्राट पुष्यमित्र शुंग और आदि शंकराचार्य ऐसे दो व्यक्ति रहे जिन्होंने सम्पूर्ण भारत को पुनः सनातन की तरफ मोड़ा। सोचिये, यह दोनों जब ऐसा कर रहे थे तो क्या उनका नारा ‘हिन्दू युक्त भारत’ का नही रहा होगा?

दूसरी ओर देखिये आप ईसाई मिशनरी से या इस्लामी तबलीग से नही पूछते उनका सपना क्या हैं ? ऐसे में सोचिये, क्या हिन्दू धर्म की साधना में लगी साध्वी प्राची का सपना हिन्दू युक्त भारत नही होगा ?

साध्वी प्राची ने प्रश्न को बस दूसरे ढंग से कहा हैं वरना जहाँ हिन्दू घट जाते हैं उन इलाकों में साध्वी प्राची को अजीब तरह से लेने वाले ‘पढ़े लिखे’ हिन्दू रहते जाकर क्यों नही रहते?

कितने कुलदीप नैयर, तीस्ता, राजेन्द्र सच्चर, बरखा, मनीष तिवारी, लालू , राहुल गांधी, राजदीप, जामिया नगर में सबके बीच रहते हैं ??

वे नही रहेंगे क्योंकि कम आबादी में हिंदुओं का जीवन कितना अभिशप्त होता हैं यह थार पारकर और सिंध में प्रतिदिन अगवा हो रही हिन्दू कन्याओं के घरों से पूछिये या बांग्लादेश में बंगाल विभाजन के वक्त ईस्ट बंगाल में चले गए 40% प्रतिशत हिंदुओं के घटकर 8-9 % होने की दशा से पूछिये ?

हमारा समर्थन हैं हिन्दू युक्त भारत को यह सदा रहेगा ।

लेखक सीसीएस दिल्ली में शोधार्थी हैं

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