Saturday, June 15, 2024
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Homeजियो तो ऐसे जियोवाल्मीकि समाज की बेटी का विवाह करने आगे आया पूरा गाँव

वाल्मीकि समाज की बेटी का विवाह करने आगे आया पूरा गाँव

यह दृश्य है मेरे जालोर का। ये जालोर है..
जालौर का नाम तो आपने सुना ही होगा अभी हाल में एकाएक बहुत चर्चा में आ गया था आज आपको जालौर के वास्तविक स्वरूप के दर्शन करवाते हैं।

जिला मुख्यालय से मात्र 10 किलोमीटर दूर का एक गांव सांकरणा। जातिगत विद्वेष के कथित माहौल में वहीं से यह सुखद खबर आई है। जहां गांव के सभी लोगों ने मिलकर हरिजन समाज की एक बालिका को गांव की बेटी मानते हुए धूमधाम से उसका विवाह किया और सामाजिक समरसता की एक अद्भुत मिसाल प्रस्तुत की है

जालोर जिले के सांकरणा गांव में दलित समाज वर्ग की विधवा महिला जिसके पति जगदीश कुमार वाल्मिकी का देहांत हो चुका है कि पुत्री का विवाह धूमधाम से गांव के ही व्यक्ति श्री सुरेश सिंह पुत्र भैरुसिह राजपुरोहित के नेतृत्व में समस्त ग्रामवासियों ने किया। सुरेश सिंह राजपुरोहित ने अपने स्वयं के घर में शादी करवा कन्यादान किया और शादी के दौरान उस कथित दलित परिवार को परिवार भाव के साथ अपने घर में रखा।

बैन्ड व ढ़ोल थाली से सभी ग्राम वासियों द्वारा बारात का स्वागत किया गया, तथाकथित उच्च वर्ग की महिलाओं ने सज धज कर मंगल गीतों के साथ वाल्मीकि समाज के दूल्हे का स्वागत किया एवं उसी प्रकार गांव के सभी लोगो ने अपनी बेटी को विदाई भी दी। विशेष बात यह है कि स्वच्छता कार्य करने वाली महिला का गांव भर में व्यवहार और विनम्रता इतनी अच्छी है कि गांव के साथ अनेक प्रवासी भी इस विवाह समारोह के लिए मुंबई से गांव तक आए ।

बरात का स्वागत कर‌‌ सुन्दर टेन्ट व्यवस्था में सुरुचिपूर्ण भोजन ‌के साथ ही कन्या को कन्या दान में 7 तोला सोना ,आधा किलो चांदी, ‌घर गृहस्थी के सभी भौतिक संसाधन, बर्तन , कपड़े, नकद रुपए भेंट किए। बताते है कि गांव भर के लोगों ने अपने गांव की बेटी के लिए इतने उपहार दिए की ट्रैक्टर की ट्रॉली भर गई । सर्व समाज के लोगों ने कन्या दान में राशि दी।
सुरेश सिंह राजपुरोहित, गोपाल सिंह राजपुरोहित, बाबूसिंह राजपुरोहित हंसाराम जी खवास, राजपुरी गोस्वामी, देवीसिंह राजपुरोहित सहित ग्रामवासियों ने समस्त मेहमानों का सम्मान किया

यह घटना , यह दृश्य अपने आप में इकलौता उदाहरण नही है, ऐसे बहुत सारे उदाहरण हमारे आसपास है। पर सामान्यतः परिवार भाव, अपनत्व , कर्तव्य भाव के साथ संपन्न इन प्रसंगों का लोग प्रचार प्रसार नही करते…. क्योंकि मन का संस्कार है।6 वर्ष पूर्व ऐसे ही एक अति पिछड़े सामाजिक वर्ग के पहले सामूहिक विवाह कार्यक्रम में गोदन विद्यालय के हमारे स्टाफ साथियों ने मिलकर 40 सेट पलंग(बिस्तर, तकिया चद्दर सहित ) की व्यवस्था की थी। जालोर नगर में लगभग 3-4 वर्ष पूर्व एक अति पिछड़े वर्ग के भव्य सामाजिक सम्मेलन की सारी व्यवस्थाएं अन्य समाज बंधुओं ने की थी। अपना कर्तव्य मान कर की थी। बहुत सारे अच्छे उदाहरण है, और बढ़ने चाहिए।

अच्छे काम करना, लगातार करना, और अच्छे कार्यो की लाइन को बड़ा करते जाना ही पुराने घावों का इलाज है।

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