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श्रद्धांजलि
 

  • जब अपनी ही फिल्म  नहीं देख पाई थी जयललिता‍

    जब अपनी ही फिल्म नहीं देख पाई थी जयललिता‍

    जयललिता ने 1965 में अपनी पहली तमिल फिल्म “वेन्निरा अदाई” (सफेद लिबास) महज 16-17 साल की उम्र में की थी। अजीब संयोग ये रहा कि इस फिल्म को सेंसर बोर्ड ने “एडल्ट” श्रेणी का सर्टिफिकेट दिया था। इस तरह नाबालिग जयललिता खुद अपनी फिल्म सिनेमाघर में जाकर नहीं देख सकती थीं। माना जाता है कि उनकी फिल्म को एक गाने की वजह से एडल्ट सर्टिफिकेट दिया गया था।

  • फिदेल कास्त्रो के रुप में एक किंवदंती का अंत

    फिदेल कास्त्रो के रुप में एक किंवदंती का अंत

    90 वर्ष की उम्र में फिदेल कास्त्रो के निधन के साथं विश्व इतिहास के एक युग का अंत हो गया है। आज की पीढ़ी के लिए फिदेल कास्त्रो भले रोमांच पैदा करने वाला नाम नहीं है, पर 60 और 70 के दशक में पूरी दुनिया में सशस्त्र विद्रोह और क्रांति से तख्ता पलटने का ख्वाब देखने वालों के लिए फिदेल कास्त्रो लेनिन और माओ से ज्यादा प्रेरणादायी नाम बन गया था।

  • अविस्मरणीय रहेगा श्री दुलीचंद जी बरडिया का योगदान

    अविस्मरणीय रहेगा श्री दुलीचंद जी बरडिया का योगदान

    राजनांदगांव। शहर के प्रतिष्ठित सराफा व्यवसायी और समाजसेवी स्व.दुलीचन्द जी बरडिया को जैन श्री संघ सहित जन प्रतिनिधियों, सामाजिक संगठनों, संस्थाओं के पदाधिकारियों, पत्रकारों तथा शुभचिन्तकों ने भावभीनी श्रद्धांजलि अर्पित की।

  • पर्यावरणविद् डी के जोशी का मिशन अधूरा

    प्रसिद्ध पर्यावरणविद् एवं सुप्रीम कोर्ट मानीटरिंग कमेटी के सदस्य डीके जोशी का जन्म 1938 में गुजरात ( पाकिस्तान) में हुआ था। पिता अयोध्यालाल जोशी और मां प्रकाशवती थे। विभाजन के बाद परिवार अजमेर में आकर बसा। यहीं पर डीके जोशी की पढ़ाई हुई। उन्होंने स्नातक किया। इसके बाद नौकरी की, अखबार से जुड़े, कारोबार किया, राजनीति में भी रहे। कांग्रेस के उत्तर प्रदेश महामंत्री रहे। अखबार की नौकरी की।

  • आज गांधी की अहिंसा अधिक प्रासंगिक है

    आज गांधी की अहिंसा अधिक प्रासंगिक है

    यह हमारे लिये गौरव की बात है कि राष्ट्रपिता महात्मा गांधी का जन्मदिन 2 अक्टूबर अब अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जाता है। गांधी की अहिंसा ने भारत को गौरवान्वित किया है, भारत ही नहीं, दुनियाभर में अब उनकी जयन्ती को बड़े पैमाने पर अहिंसा दिवस के रूप में मनाया जा रहा है।

  • शहीदों को श्रद्धांजलि में दिखि मुंबई शहर की भावुकता

    शहीदों को श्रद्धांजलि में दिखि मुंबई शहर की भावुकता

    मुंबई। ग्लैमर की राजधानी कहे जानेवाले मुंबई शहर को भले ही बहुत हसीन सपनों का शहर माना जाता हो। लेकिन यह शहर अपने राष्ट्र प्रेम के लिए तो समर्पित है ही, देश के लिए अपनी जान देनेवाले शहीदों के प्रति बहुत संवेदनशील, भावुक और मुसीबत के मर्म को समझनेवाला शहर भी है।

  • प्रख्यात साहित्यकार डॉ. प्रभाकर श्रोत्रिय की यादें डॉ.चंद्रकुमार जैन ने साझा की अमूल्य जानकारी

    प्रख्यात साहित्यकार डॉ. प्रभाकर श्रोत्रिय की यादें डॉ.चंद्रकुमार जैन ने साझा की अमूल्य जानकारी

    राजनांदगांव। प्रख्यात लेखक, आलोचक और संस्कृति चिंतक डॉ. प्रभाकर श्रोत्रिय की अहम यादें संस्कारधानी से भी जुड़ी हैं। 2005 के सितंबर माह में जिस दौर में यहां मुक्तिबोध स्मारक-त्रिवेणी संग्रहालय की स्थापना हुई थी, तब वे यहां आये थे।

  • टैक्स गुरु स्व.  सुभाष लखोटियाः मानवीयता की गहराई से जुड़ा व्यक्तित्व

    टैक्स गुरु स्व. सुभाष लखोटियाः मानवीयता की गहराई से जुड़ा व्यक्तित्व

    सुभाष लखोटिया के प्रशंसकों एवं चहेतों के लिए यह विश्वास करना सहज नहीं है कि वे अब इस दुनिया में नहीं रहे। भारत के शीर्ष टैक्स और निवेश सलाहकार के रूप में चर्चित एवं सीएनबीसी आवाज चैनल पर चर्चित शो ‘टैक्स गुरु’ के 500 से अधिक एपिसोड पूरा कर विश्व रिकार्ड बनाने वाले श्री लखोटिया अनेक पुस्तकों के लेखक थे।

  • आचार्य विनोबा भावे रोशनी जिनके साथ चलती थी

    आचार्य विनोबा भावे रोशनी जिनके साथ चलती थी

    महापुरुषों की कीर्ति किसी एक युग तक सीमित नहीं रहती। उनका लोकहितकारी चिन्तन कालजयी होता है और युग-युगों तक समाज का मार्गदर्शन करता है। आचार्य विनोबा भावे हमारे ऐसे ही एक प्रकाश स्तंभ है, जिनकी जन्म जयन्ती 11 सितम्बर को मनाई जाती है।

  • हर दिल अज़ीज़ नेता थे राजीव गांधी

    हर दिल अज़ीज़ नेता थे राजीव गांधी

    श्री राजीव गांधी ने उन्नीसवीं सदी में इक्कीसवीं सदी के भारत का सपना देखा था. स्वभाव से गंभीर लेकिन आधुनिक सोच और निर्णय लेने की अद्भुत क्षमता वाले श्री राजीव गांधी देश को दुनिया की उच्च तकनीकों से पूर्ण करना चाहते थे. वे बार-बार कहते थे कि भारत की एकता और अखंडता को बनाए रखने के साथ ही उनका अन्य बड़ा मक़सद इक्कीसवीं सदी के भारत का निर्माण है.

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