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श्री प्रभु की खरी-खरी, रेल बजट राजनीति के लिए नहीं, देश के विकास के लिए

विपक्ष द्वारा रेल बजट के जमीनी हकीकत से दूर और यांत्रिक होने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने लोकसभा में कहा कि रेलवे को राजनीति से दूर रख कर उसे आगे बढ़ाने के प्रयासों में सहयोग किया जाना आवश्यक है।

विपक्ष द्वारा रेल बजट के जमीनी हकीकत से दूर और यांत्रिक होने के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए रेल मंत्री श्री सुरेश प्रभु ने साफ शब्दों में कहा कि रेलवे को राजनीति से दूर रख कर उसे आगे बढ़ाने के प्रयासों में सहयोग किया जाना आवश्यक है। वैश्विक मंदी के चुनौतिपूर्ण समय में पेश यह बजट आम लोगों, समाज के कमजोर एवं वंचित वर्गों को समर्पित है जिसमें संसाधन जुटाने के साथ रेलवे के स्वास्थ्य को दुरुस्त बनाने की ठोस पहल की गई है। वित्त वर्ष 2016-17 के रेल बजट पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए सुरेश प्रभु ने कहा कि यह बेहद चुनौतिपूर्ण समय है और हमारे समक्ष कठिन कार्य पूरा करने की चुनौती है क्योंकि वैश्विक मंदी का प्रभाव सामने है। इसके बावजूद हमने रेलवे को आगे बढ़ाने के लिए रणनीति बनाई है। इसमें क्षमता उन्नयन, रेल परिचालन से इतर राजस्व के नए संसाधन जुटाना, परिचालन की लागत को कम करने जैसे उपाये शामिल हैं।

रेलवे की समस्याएं पिछले काफी वर्षों में जमा हुई हैं और वह किसी पर आरोप नहीं लगा रहे हैं। हालांकि नरेंद्र मोदी के नेतृत्व वाली सरकार के आने के बाद सरकार के उपायों के कारण पिछले दो वर्षों में रेलवे की स्थिति थोड़ी बेहतर हुई है। अभी काफी आगे जाना है और उनका प्रयास होगा कि रेलवे को राजनीति से दूर रखा जाए। रेल बजट के यांत्रिक होने और जमीनी हकीकत से दूरे होने के आरोपों को खारिज करते हुए उन्होंने कहा, ‘इस बजट में सभी बातें आम लोगों के लिए ही हैं। इस बजट को आम लोगों को ध्यान में रखते हुए ही तैयार किया गया है। इसमें ई टिकटिंग, सामान्य लोगों के लिए रेल डिब्बे, ट्रेनें, खानपान सुविधा, विकल्प व्यवस्था, स्वच्छता एवं सुरक्षा प्रबंध समेत महिलाओं एवं शिशुओंं की सुविधाओं को भी ध्यान में रखा गया है।’

रेल मंत्री ने कहा कि रेल बजट में कमजोर एवं वंचित वर्ग के लोगों का विशेष ध्यान रखा गया है जो बात प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी करते रहे हैं। अनुसूचित जाति, जनजाति, स्वयं सहायता समूह के लिए भी विशेष पहल की गई है और इन वर्गों के पदों को भरने की भी पहल की गई है। स्टेशनों पर स्टाल अज, अजजा वर्गो को देने की पहल की जा रही है। रेल बजट में राज्यों को आबंटन बढ़ाया गया है। पिछले वर्ष की तुलना में बिहार का आबंटन 97 प्रतिशत बढ़ाया गया जबकि ओड़ीशा का आबंटन 292 प्रतिशत, तमिलनाडु को आबंटन 77 प्रतिशत बढ़ाया गया है। उन्होंने जानकारी दी कि कर्नाटक को इस वर्ष 2779 करोड़ रुपए आबंटित किया गया है जबकि केरल को 1041 करोड़ रुपए, ओड़ीशा को 4682 करोड़ रुपए, पश्चिम बंगाल को 3820 करोड़ रुपए, बिहार को 3171 करोड़ रुपए आबंटित किया गया जो पिछले वर्ष की तुलना में अधिक है। सुरेश प्रभु ने कहा, ‘हमारा प्रयास सहकारी संघवाद को आगे बढ़ाने का है जहां राज्यों का विकास हो और राज्य अपना विकास तय कर सकें।’

सार्वजनिक निजी साझेदारी की रेलवे की पहल की कुछ सदस्यों द्वारा आलोचना किए जाने का जवाब देते हुए उन्होंने कहा कि सार्वजनिक निजी साझेदारी (पीपीपी) कोई ऐसा विषय नहीं है जिसे हम लेकर आए हों। पूर्व के रेल मंत्रियों ने इसका समर्थन किया है। पीपीपी ऐसा विषय है जिसे राज्य सरकार आगे बढ़ाना चाहते हैं और पश्चिम बंगाल एवं केरल ने ऐसा किया है। रेलवे के स्वास्थ्य को ठीक करने की पहल के तहत हमने सात सूत्री एजंडे को आगे बढ़ाया जिसमें परिचालन लागत कम करना, राजस्व एवं संसाधन बढ़ाना शामिल हैं। इसके अलावा विभिन्न उपायों से हमने खर्च बचाए। माल ढुलाई के लिए रेलवे कुछ ही वस्तुओं पर निर्भर है, इसे देखते हुए बाजार अध्ययन करा रहे हैं ताकि इसमें और सामग्रियों को जोड़ा जा सके।

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