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शरद पवार के यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान का गड़बड़झाला

महाराष्ट्र विधानसभा सुवर्ण महोत्सव प्रदर्शन 1987-88 में रखने के लिए कलामहर्षी पद्मश्री कै.एम.आर. आचरेकर का तैलचित्र लिया था जो वर्तमान में शरद पवार के यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान के कब्जे में हैं। जिसे लगातार पत्राचार करने के बाद भी महाराष्ट्र विधानमंडल और आचरेकर परिवार को यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान घास नहीं डालने की जानकारी आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली को महाराष्ट्र विधानमंडल ने दी हैं। प्रतिष्ठान के पास किसी भी तरह का मालिकाना दस्तावेज न होते हुए भी तैलचित्र देने में छल-कपट के मद्देनजर यह तैलचित्र विधानमंडल से प्रतिष्ठान के पास कैसे गया? इसको लेकर विभिन्न चर्चाएं फ़िलहाल् विधानमंडल के गलियारे में हैं। यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान में शरद पवार की एनसीपी पार्टी का कार्यक्रम और अन्य सामाजिक कार्यक्रम होते है और एनसीपी की एक अलग राजनैतिक हैसियत भी है।

आरटीआई कार्यकर्ता अनिल गलगली ने महाराष्ट्र विधानमंडल और यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान से पद्मश्री आचरेकर के तैलचित्र की जानकारी मांगी थी। महाराष्ट्र विधानमंडल ने अनिल गलगली को उनके रेकॉर्ड पर मौजूद दस्तावेजों की कॉपी दी। दिनांक 31 अगस्त 1988 को महाराष्ट्र विधानमंडल के ग्रंथपाल अनंत थोरात ने आचरेकर परिवार को पत्र भेजकर महाराष्ट्र विधानसभा सुवर्ण महोत्सव प्रदर्शन 1987-88 में रखने के लिए कलामहर्षी पद्मश्री कै.एम.आर. आचरेकर के तैलचित्र की मांग करते हुए प्रदर्शन खत्म होते ही तैलचित्र लौटाने और आने जाने की व्यवस्था सचिवालय द्वारा करने का लिखित आश्वासन दिया था लेकिन असल में तैलचित्र आचरेकर परिवार को देने के बजाय यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान के दूसरी मंजिल पर पूर्व की छोर पर दीवार पर टंगा हुआ पाया गया। आचरेकर परिवार ने तैलचित्र के लिए महाराष्ट्र राज्य सूचना आयोग के दरवाजे तक दस्तक लगाने के बाद भी प्रतिष्ठान झुका नहीं, उल्टे आचरेकर परिवार से वारिस अधिकार प्रमाणपत्र, घाटा मुआवजा हामीपत्र और विशेष मुखत्यारपत्र सहित तैलचित्र का असली मालिक और उनके वारिस का प्रमाणपत्र मांगकर मामले का अन्य दिशा में डाइवर्ट करने का प्रयास कर रहे हैं। महाराष्ट्र विधानमंडल ने प्रतिष्ठान से पत्राचार बार बार तो किया हैं लेकिन पॉवरफुल प्रतिष्ठान से सीधा जबाब तलब करने से डर रही हैं।

अनिल गलगली के अनुसार पद्मश्री जैसा सम्मान हासिल करनेवाले आचरेकर का ऐतिहासिक तैलचित्र प्रदर्शनी के नाम पर लेनेवाली महाराष्ट्र विधानमंडल ने प्रतिष्ठान के खिलाफ में चोरी का मामला दर्ज करने की आवश्यकता हैं क्योंकि जो तैलचित्र महाराष्ट्र विधानमंडल ने प्रदर्शन के प्रयोजन के लिए मंगवाया था वह यशवंतराव प्रतिष्ठान में कैसे गया ? इसे गंभीरता न लेने यशवंतराव प्रतिष्ठान आचरेकर परिवार से असली मालिक के सबूत मांगने का जुर्रत कर रही हैं। महाराष्ट्र विधानमंडल से हुए किसी भी तरह का पत्राचार फ़िलहाल प्रतिष्ठान के पास नहीं होने से तैलचित्र प्रतिष्ठान ने चुराया तो नहीं है ना यह आशंका जताते हुए महाराष्ट्र विधानमंडल की प्रतिष्ठा यह यशवंतराव चव्हाण प्रतिष्ठान की नकारात्मक भूमिका से विवादित हो रही हैं, ऐसा मत अनिल गलगली ने व्यक्त किया हैं।।

प्रतिष्ठान का छल-कपट

अनिल गलगली के आवेदन को प्रतिसाद देते हुए प्रतिष्ठान के जन सूचना अधिकारी और प्रतिष्ठान के महासचिव श.गं.काले ने आवश्यक शुल्क अदा करने की सूचना तो दी लेकिन जानबुझकर शुल्क की रकम नहीं बताई। अनिल गलगली ने पत्र भेजकर शुल्क की रकम पूछते ही काले ने शुल्क की रकम बताने के बजाय मांगी गई जानकारी तीसरे पक्ष से जुड़ी होने का नया दावा खेलते हुए संबंधित होने का दावा करते हुए महाराष्ट्र विधानमंडल और आचरेकर परिवार को पत्र भेजा हैं। काले के ऐसे कौन से गुण और अनुभव देखते हुए प्रतिष्ठान ने जन सूचना अधिकारी इस पद की जिम्मेदारी दी हैं, ऐसा सवाल गलगली ने खड़ा करते हुए बताया कि एकही आवेदन पर विभिन्न जबाब देकर काले प्रतिष्ठान को संकट में डाल रहे हैं।

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