Saturday, June 15, 2024
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बधिरों के लिए वरदान है ट्रांसक्राइबग्लास!

एक भारतीय और एक अमेरिकी विद्यार्थी ने मिलकर एक ऐसे स्टार्ट-अप की स्थापना की है जो कम सुनाई देने वाले लोगों की मदद के लिए बोली गई बात को लिखित में आपकी नज़र के सामने प्रस्तुत कर देता है।

ट्रांसक्राइबग्लास  बधिर, कम सुनने वाले बुजुर्ग और वे लोग जो मौखिक संचार को बेहतर तरीके से समझना चाहते हैं, के लिए खासा उपयोगी है। यह स्मार्ट ग्लास डिवाइस रीयल टाइम में बोलने का टेक्स्ट में अनुवाद करता है और इसे इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति इसे एक छोटे पारदर्शी डिसप्ले पर देख सकता है।

विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुमानों के अनुसार, साल 2050 तक दुनिया में करीब 2.5 अरब लोगों की सुनने की क्षमता में कमी आ सकती है। इसी संस्था के एक दूसरे अनुमान में जानकारी दी गई है कि भारत में लगभग 6 करोड़ 30 लाख लोगों को कम सुनाई देता है। कम सुनने वाले और बधिर लोगों को संवाद करने में परेशानी होती है और इसका खासा असर भी देखने को मिलता है, उन्हें रोज़गार पाने में दिक्कत हो सकती है, मजदूरी कम मिलती है और साथ ही वे समाज से अलग-थलग पड़ जाते हैं।

येल विश्वविद्यालय में नई दिल्ली के विद्यार्थी माधव लावाकरे और स्टैनफ़र्ड विश्वविद्यालय के ग्रेजुएट टॉम प्रिटस्की ने मिलकर ट्रांसक्राइबग्लास नाम के एक स्टार्ट-अप की स्थापना की जो सुनने की परेशानी से पीडि़त लोगों के लिए एक किफायती समाधान तैयार करता है। उनके उत्पाद का नाम भी ट्रांसक्राइबग्लास है, जो पहना जाने वाला तकनीकी सहायक डिवाइस है। यह बधिर, कम सुनने वाले बुजुर्ग और वे लोग जो मौखिक संचार को बेहतर तरीके से समझना चाहते हैं, के लिए खासा उपयोगी है। यह स्मार्ट ग्लास डिवाइस रीयल टाइम में बोलने का टेक्स्ट में अनुवाद करता है और इसे इस्तेमाल करने वाला व्यक्ति इसे एक छोटे पारदर्शी डिसप्ले पर देख सकता है। दूसरे स्पीच टू टेक्स्ट एप्लीकेशन के उलट जहां डिवाइस का इस्तेमाल करने वाले को बातचीत का अनुसरण करने के लिए स्क्रीन पर नीचे देखना पड़ता था, ट्रांसक्राइबग्लास का उपयोग करने वालों को बोलने वालों को देखते हुए कैप्शन पढ़ने की सुविधा होती है।

ट्रांसक्राइबग्लास का इस्तेमाल करने के लिए व्यक्ति को इसके मोबाइल ऐप पर इसके कैप्शन सोर्स से जुड़ना होगा। उदाहरण के लिए गूगल एपीआई या डीपग्राम। टेक्स्ट को ब्लूटूथ के माध्यम से ट्रांसक्राइबग्लास डिस्प्ले पर प्रसारित किया जाता है। इसके व्यापक इस्तेमाल के मकसद से इसे 30 ग्राम से भी कम वजन का डिजाइन किया गया और इसे चश्मे या खाली फ्रेम से भी जोड़ा जा सकता है। इस्तेमाल करने वाले कैप्शन के फॉंट का साइज़ बदल सकते हैं। ट्रांसक्राइबग्लास मौजूदा समय में रोमन या लैटिन वर्णमाला का उपयोग करने वाली किसी भी भाषा में इस्तेमाल हो सकता है।

लावाकरे तब नई दिल्ली के स्कूल में 11वीं कक्षा में पढ़ते थे, जब उनके एक दोस्त ने सिर्फ इसलिए स्कूल छोड़ दिया क्योंकि सुनने में कठिनाई के कारण वह अपनी कक्षा के पढ़ाई और आसपास की बातचीत को ठीक से सुन नहीं पाता था। लावाकरे अपने इस दोस्त की मदद करना चाहते थे। यूएस-इंडिया साइंस एंड टेक्नोलॉजी इंडॉवमेंट फंड (यूएसआईएसटीईएफ) से 2020 में अनुदान प्राप्त करने वाले लावाकरे के अनुसार, ‘‘मोबाइल ऐप रीयल टाइम में स्पीच से टेक्स्ट में ट्रांसक्राइब कर सकते हैं लेकिन चूंकि मेरा दोस्त दृश्य संकेतों पर बहुत ज्यादा निर्भर था, इसलिए उसकी सीधी नजर में कैप्शन को लाने की ज़रूरत थी।’’

प्रिटस्की ने स्टैनफ़र्ड यूनिवर्सिटी में बधिरों और कम सुनने वालों के लिए एक क्लब की स्थापना की थी। उन्हें तीन साल की उम्र से ही सुनने की समस्या थी और वह बातचीत के लिए हमेशा हियरिंग एड और लिप रीडिंग का इस्तेमाल करते हैं। लावाकरे की तरह ही प्रिटस्की ने भी खुद के साथ दूसरों की मदद के लिए किफायती कैप्शनिंग डिवाइस की संभवानाओं को तलाशना शुरू किया। प्रिटस्की के अनुसार, ‘‘मुझे फिल्मों के लिए कैप्शन वास्तव में बहुत पसंद हैं। मैंने सोचा कि वास्तविक जीवन में उनका होना कितना शानदार होगा।’’

लावाकरे और प्रिटस्की की मुलाकात एक साझे दोस्त के जरिए हुई। ये दोनों सहायक  तकनीक की दुनिया से गहराई से जुड़े हुए थे, मिलने से पहले वे दोनों स्वतंत्र रूप से इस तरह के आइडिया पर काम कर रहे थे। लावाकरे के अनुसार, येल में एक पूर्णकालिक विद्यार्थी होते हुए अपने दम पर अपने व्यवसाय को चला पाना कठिन था। इसी  कारण प्रिटस्की का साथ अपरिहार्य बन गया। एक उपयोगकर्ता के नजरिए से प्रिटस्की की अंतदृष्टि स्टार्ट-अप के लिए एक ‘‘ठोस नज़रिया’’ देने की तरह थे।

प्रोटोटाइप

इस्तेमाल करने वालों से मिला फीडबैक उनकी डिजाइन प्रक्रिया का महत्वपूर्ण हिस्सा रहा। लावाकरे और प्रिटस्की का अनुमान है कि विभिन्न प्रोटोटाइप तैयार करने के दौरान उन्होंने कम से 300 लोगों से अपने उत्पाद का परीक्षण कराया। पांच अलग-अलग प्रोटोटाइप को  तैयार करने के बाद ट्रांसक्राइबग्लास अब मौजूदा समाधानों की दृष्टि से एक किफायती और आरामदायक विकल्प पेश करने को तैयार है। लावाकरे कहते हैं, ‘‘ट्रांसक्राइबग्लास के साथ जो चीजें वास्तव में हमारे लिए मायने रखती है वह थी इसकी सामाजिक स्वीकार्यता।’’ प्रिटस्की के अनुसार, ‘‘हमारा लक्ष्य अपनी तकनीक को लेकर किसी खास प्लेटफॉर्म के साथ एकीकृत करने का नहीं है। हम किसी भी एपीआई से एकीकृत कर सकते हैं- गूगल स्पीच, डीपग्राम, माइक्रोसॉ़फ्ट। बड़े फलक पर हमारी सोच सुनने की परेशानी से पीडि़त लोगों की परेशानी को हल करने में सहायता देना है।’’

कंपनी ने हाल ही में अपने पहले 150 प्रीऑर्डरों का उत्पादन शुरू किया है और उम्मीद है कि अगले कुछ महीनों में उन्हें भेज दिया जाएगा। ट्रांसक्राइबग्लास बीटा को लगभग 4,500 रुपए में बेचा जा रहा है और इसके आखिरी तौर पर तैयार उत्पाद की कीमत लगभग 8,000 रुपयों के आसपास होने की उम्मीद है।

लावाकरे के अनुसार, ‘‘ट्रांसक्राइबग्लास के भविष्य के संस्करणों में बहुत सारे अपग्रेड होंगे जिनमें भाषाओं का अनुवाद करने की क्षमता के अलावा ग्राफिक्स होना भी शामिल है जिससे दूसरे विक्लांग लोगों की भी मदद की जा सकेगी।’’


(फोटोग्राफ: साभार टिंकरटेक लैब्स)
(जैसन चियांग स्वतंत्र लेखक हैं और सिल्वर लेक, लॉस एंजिलिस में रहते हैं)
 
साभार- https://spanmag.com/hi से 
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