Sunday, July 14, 2024
spot_img
Homeकवितालोक परंपरा में "भाई- दूज "

लोक परंपरा में “भाई- दूज “

Sunita Tripathi

आज बहनें देती हैं भाईयों को गाली,
जो करती है उनके जीवन की रखवाली।
ब्रत करके, बलाएँ लेके ,बहु- विधि देती हैं उनको गाली।
नये अन्न से,शुद्ध मन से, नाना पकवान बना ली।
घर- आंगन खलिहान किए हैं, सबने साफ -सफाई ,
बहु विधि करके यत्न सभी ने गोबर है मंगवाई।
लोकगीत के खातिर सखियों ने हर घर फेरी लगाई।
तब जाकर हर घर से एक-एक बहू -बेटियां आईं।
गोबर से गोधन बनवाई,
मूसलचंद मंगाई ,
लोक गीत के लोक चित् ने मंगल गीत को गाई।

पूजा- पाठ किये सब मिलकर,
सबने त्यौहार मनाई,
बेचारे गोधन भाग न पाए ,
हुई उनकी खूब कुटाई ।
पांच- पांच या सात- सात,
जितना था जिसने कूटा,
लड्डू मिश्री खील -बतासे ,
सब बच्चों ने लूटा।
मिल-जुल सब त्यौहारी खाए, सबने खुशी मनाएं।
बड़ा मनोहर ,बड़ा लुभावना ,
कैसा त्यौहार है भाई।
भाई – बहन के रिश्तों की,
परंपरा कितनी निराली?

भारत ही एक धर्म -राष्ट्र हैं,
जहां मंगल होती है गाली।।
करते हैं त्यौहार यहां हर
रिश्तों की रखवाली,
प्रेम और मर्यादा की जिसने है डोर संभाली।
द्वापर युग में हुए कृष्ण ,
जिसने गोबर्धन उठा ली,
लोक- परंपरा, लोक संस्कृति,
ने अपनी जगह बना ली।।
हमको तो बस करनी है ,
इन रश्मों की रखवाली,
आर्याव्रत की यही धरोहर,
यहां पर होती मंगल गाली।
भाई- दूज, गोबर्धन पूजा,
या होली दिवाली,
रहें सभी मिल एक यहां
हर घर में हो खुशहाली।
इन्हे बचाने के खातिर ,
बस करनी है रखवाली।

“भाई दूज” का पर्व अनोखा
बहनें देती हैं भाई को गाली।

– डॉ सुनीता त्रिपाठी “जागृति”
नई दिल्ली

image_print

एक निवेदन

ये साईट भारतीय जीवन मूल्यों और संस्कृति को समर्पित है। हिंदी के विद्वान लेखक अपने शोधपूर्ण लेखों से इसे समृध्द करते हैं। जिन विषयों पर देश का मैन लाईन मीडिया मौन रहता है, हम उन मुद्दों को देश के सामने लाते हैं। इस साईट के संचालन में हमारा कोई आर्थिक व कारोबारी आधार नहीं है। ये साईट भारतीयता की सोच रखने वाले स्नेही जनों के सहयोग से चल रही है। यदि आप अपनी ओर से कोई सहयोग देना चाहें तो आपका स्वागत है। आपका छोटा सा सहयोग भी हमें इस साईट को और समृध्द करने और भारतीय जीवन मूल्यों को प्रचारित-प्रसारित करने के लिए प्रेरित करेगा।

RELATED ARTICLES
- Advertisment -spot_img

लोकप्रिय

उपभोक्ता मंच

- Advertisment -

वार त्यौहार