Wednesday, May 29, 2024
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भारत वैश्विक स्तर पर अपनी बढ़ती धमाकेदार उपादेयता को सिद्ध किया है। जी-20 (अब जी – 21) आर्थिक रूप से ताकतवर राष्ट्र – राज्यों का एक समूह है। इसलिए इस समूह द्वारा लिए गए फैसले से अंतरराष्ट्रीय व्यापार की गतिविधि बहुत अधिक मात्रा में प्रभावित होती है ।भारत ने अपने कूटनीतिक उपादेयता,वैश्विक व्यवस्था में धमाकेदार उपस्थिति के कारण और अपने सांस्कृतिक उपादेयता के कारण सर्वसम्मति से 83 बिंदुओं पर निर्विरोध अनुमोदन लगवा चुका है। यह वैश्विक स्तर पर भारत की उपादेयता है ।भारत ने वैश्विक स्तर पर समग्र और स्थाई शांति स्थापित करने की अपील किया है, इसमें कहा गया है कि प्रत्येक देश प्रत्येक दूसरे देश की क्षेत्रीय अखंडता ,संप्रभुता एवं अंतर्राष्ट्रीय मानवीय कानून का पालन करेंगे जिससे वैश्विक स्तर पर शांति और स्थिरता की सुरक्षा हो सके ।ऐसा करने से वैश्विक स्तर पर शांति और सद्भाव कायम किया जा सकता है।

जी – 20 के सम्मेलन में भारत के अलावा 19 देश और विशेष तौर पर आमंत्रित 9 देश और 14 वैश्विक संगठनों के व्यक्तिव शामिल हुए हैं। भारत ने एक धरती, एक विश्व व एक भविष्य के साथ ही विकसित और विकासशील देशों के हितों को लेकर चर्चाएं किया है। भारत के प्रस्ताव पर सर्वसम्मति से स्वीकृति मिली है। यह वैश्विक स्तर पर भारत की कूटनीतिक कौशल का योगदान है। ऐतिहासिकता के आधार पर 1999 में एशिया में आर्थिक संकट आया था ,तब विभिन्न देशों के वित्त मंत्रियों और केंद्रीय बैंक के गवर्नर ने मिलकर एक वैश्विक फोरम की स्थापना पर विचार- विमर्श किया जहां पर वैश्विक अर्थव्यवस्था और फाइनेंशियल मुद्दों पर परिचर्चा किया जा सके। भारत जी-20 की 18वीं बैठक का मेजबानी कर रहा है, इसमें टिकाऊ विकास ,स्वास्थ्य, कृषि ,ऊर्जा ,पर्यावरण ,जलवायु परिवर्तन और भ्रष्टाचार निरोधी मुद्दों पर विशेष तौर पर चर्चा हो रही है।

इस समूह की शक्ति इसमें सम्मिलित देशों से ही स्पष्ट होती है ।इसमें अमेरिका, ब्रिटेन, अर्जेंटीना, ऑस्ट्रेलिया, ब्राजील ,कनाडा ,चीन, फ्रांस, जर्मनी ,भारत, इंडोनेशिया, इटली, जापान ,कोरिया, मेक्सिको, रूस सऊदी, दक्षिण अफ्रीका, तुर्किएं और यूरोपियन यूनियन(EU )अर्थात यूरोप के देश का मजबूत समूह है। G- 20 के सदस्यों के पास संसार की 85% जीडीपी ,75 % वैश्विक व्यापार, संसार की दो / तिहाई आबादी है। इस तरह वैश्विक स्तर पर जी-20 के द्वारा लिया गया निर्णय वैश्विक अर्थव्यवस्था पर व्यापक प्रभाव डालता है। भारत का वैश्विक स्तर पर दमदार उपादेयता इसी तथ्य से लगाया जा सकता है कि भारत की सिफारिश पर अफ्रीकन यूनियन (AU) को सदस्य बनाया गया है। भारत की अध्यक्षता में सभी सदस्यों की आम सहमति से जो घोषणा हुआ है उसको” दिल्ली घोषणा पत्र “नाम दिया गया है ।

भारत द्वारा प्रस्तावित 83 बिंदुओं को आम सहमति से स्वीकार किया गया है।भारत के वैचारिक सहयोग से अफ्रीकन यूनियन बना नया G – 20 का सदस्य और भारत के पहल पर वैश्विक बायोफ्यूल गठबंधन का निर्माण हुआ है । वैश्विक स्तर पर स्वच्छ ईंधन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से गठित इस समूह में भारत के साथ अमेरिका, ब्राजील, बांग्लादेश यूएई और इटली शामिल है। भारत वैश्विक व्यवस्था को एक नवीन दिशा देने के लिए तत्पर है। भारत की अध्यक्षता सर्व समावेशी और पारदर्शी है। भारत वैश्विक कल्याण के लिए सभी देशों को एक साथ चलने की अपील कर रहा है। वैश्विक स्तर पर पुरानी समस्याएं अब नवीन समाधान की मांग कर रहे हैं। हमें वैश्विक व्यवस्था को नई नेतृत्व देने के लिए शारीरिक और मानसिक स्तर पर तैयार होना चाहिए ।

भारत ने प्रत्येक धर्म का समुचित सम्मान किया है, अर्थात भारत संवैधानिक मूल्यों का सम्मान किया है। मोदी जी ने वैश्विक अर्थव्यवस्था में उथल-पुथल ,उत्तर और दक्षिण का विभेद ,पूर्व और पश्चिम की दूरी ,खाद्य, ईंधन व उर्वरक प्रबंधन, आतंकवाद और साइबर सुरक्षा, स्वास्थ्य, ऊर्जा और जल सुरक्षा को लेकर वैश्विक स्तर पर चुनौतियां हैं।इसको मोदी जी ने रेखांकित किया है। हम सभी सम्मानित सदस्यों को इन चुनौतियों का सामना करने के लिए तत्पर होना चाहिए। भारत की कूटनीतिक उपादेयता इस तथ्य से प्रमाणित हो रहा है कि भारत स्वस्थ ,टिकाऊ, संतुलित एवं समावेशी विकास के स्तर पर तत्पर है। भारत में जलवायु परिवर्तन से मुकाबला करने और लैंगिक समानता को बल देने और महिलाओं और लड़कियों को सशक्त बनाने पर जोर दिया है।

(लेखक प्राध्यापक एवँ राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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