Sunday, May 26, 2024
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लोकतांत्रिक शासन की प्रासंगिकता

लोकतंत्र जनता का, जनता के लिए एवं जनता के द्वारा शासकीय व्यवस्था है। लोकतंत्र का गणितीय आभार शासक का शासित के प्रति उत्तरदाई और जिम्मेदारी से होता है।शासक अपने विधाई विधायन से और कार्यपालकीय उपादेयता से विश्वास दिलाया अर्थात विधायिका ऐसे कानून/ विधि का निर्माण करें जो लोक कल्याणकारी लक्ष्य( गरीबी उन्मूलन ,बेरोजगारी निवारण, बीमारी में सुरक्षा एवं बुढ़ापा में सहयोग) को पूरा करता हो एवं कार्यपालकी कृत्य (सुशासन )को क्रियान्वित करता हो। मोदी सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना /पैकेज से गरीबों के लिए 1.70 लाख करोड़ रुपए का एक व्यापक राहत पैकेज दिया है ताकि उनको कोरोना वायरस (कोविड-19) के खिलाफ संघर्ष के लिए मदद मिल सके ।सरकार ने 80करोड़ निर्धनों को प्रत्येक महीने 5 किलो गेहूं या चावल और 1 किलो पसंदीदा दाल मुफ्त में प्रदान कर रही है। लोकतंत्र में शासक और शासित के बीच परस्पर विश्वास ही लोकतांत्रिक शासन की सफलता है ।सरकार ने 13.62 करोड़ परिवारों को लाभ पहुंचाने के लिए मनरेगा मजदूरी को ₹182 से बढ़ाकर ₹202 प्रतिदिन किया है। 3 करोड़ निर्धन वरिष्ठ नागरिकों, गरीब विधवाओं और गरीब दिव्यांगों को ₹1000 की अनुग्रह राशि प्रदान की जा रही है। सरकार ने प्रधानमंत्री गरीब कल्याण योजना के अंतर्गत 80करोड़ व्यक्तियों यानी कि भारत की लगभग दो-तिहाई आबादी को कवर कर रही है।इस तरह उपर्युक्त आंकड़ों से स्पष्ट होता है कि जनता शासकीय कार्यों से अति प्रसन्न है।

लोकतंत्र में सत्ता किसको मिलेगा यह सुनिश्चित करने का अधिकृत होती है भारत की जनता। अब समसामयिक सवाल उठता है कि 2024 में नरेंद्र मोदी जी ही क्यों? इस सवाल/ प्रश्न का प्रासंगिक उत्तर नौ सालों के सरकार के उपादेयता, प्रत्येक क्षेत्र में गुणात्मक प्रदर्शन के आधार पर एवं जनमत सर्वेक्षण के आधार पर इसका शल्य चिकित्सा करते हैं।

2019 में मोदी सरकार ने पीएम किसान निधि की शुरुआत की और किसानों के खाते में प्रत्येक वर्ष ₹6000 नगद हस्तांतरण सुनिश्चित किया ।नियमित रूप से किस्तों में मिलने वाली इस सहयोग राशि से सीमांत किसानों और छोटे किसानों को भी अच्छी गुणवत्ता वाले सामान खरीदने, जमीन की उर्वरा शक्ति बढ़ाने और अपनी आय में गुणात्मक वृद्धि करने का अवसर प्रदान किया है। भारत में लगभग 70% आबादी किसानों की है । किसान भारत के मेरुरज्जु( रीड की हड्डी )है। भारत के लगभग 58 % आबादी कृषि( खेती) पर अपने आजीविका के लिए निर्भर है। हमारे सकल घरेलू उत्पाद में कृषि( खेती) का भी बड़ा योगदान है।

मोदी सरकार ने कई कल्याणकारी योजनाएं चलाई हैं। इनका मौलिक उद्देश्य महिलाओं का सशक्तिकरण करना है, ताकि वे वैभव भारत के विकास में सहयोग कर सकें। संपूर्ण आबादी में महिलाओं की सहभागिता 48 % है। एक बहु संख्यक आबादी का सशक्तिकरण जनसंख्या का सशक्तिकरण है ।इन सब के साथ वे सामाजिक बेड़ियों से बाहर निकली है ,वही दैनिक जीवन में उनकी मुश्किलें भी कम हुई हैं ।मोदी जी लोगों तक कल्याणकारी लाभ पहुंचाने से भी एक कदम आगे बढ़कर जन – आंदोलन के माध्यम से व्यापक सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रयासरत हैं। मोदी जी के नेतृत्व में महिलाओं को सामाजिक रूढ़ियों को तोड़कर उन्हें जीवन और व्यवसाय में आगे बढ़ने के लिए प्रेरित व उर्जित कर रहे हैं। जीवन के प्रत्येक द्वार पर अवसरों के द्वार खोले जा रहे हैं ,ताकि महिलाओं को अधिक से अधिक विकास के अवसर मिल सके और उनके भविष्य के सपने साकार हो सके।

भारत की आबादी में युवाओं की सहभागिता 68% है। मोदी जी का देश के युवाओं से जुड़ाव अति पसंदीदा कार्यक्रम है। उनके नेतृत्व में सरकार प्रत्येक कदम पर युवाओं का साथ दे रही है और देश की प्रगति के लिए उनकी प्रतिभा का हर संभव सदुपयोग कर रही है। वर्तमान का युवा प्रत्येक असंभव को संभव करने का क्षमता धारण करता है। भारत की आबादी में युवाओं का अनुपात देश के लिए एक बड़ा लाभ है ।युवा ही देश के विकास और प्रगति में सहयोग करता है।

भारत को एक युवा देश के रूप में माना जाता है। भारतीय युवाओं की इस अवधारणा “आत्मसात कर सकते हैं” को मोदी जी प्रत्येक नीतियों में प्रोत्साहित कर रहे हैं। मोदी जी की उपादेयता रही है कि युवा अपने सपनों को साकार करने की धारिता ग्रहण करें। आज भारत का युवा नौकरी तलाशने वाला नहीं बल्कि नौकरी देने वाला होता जा रहा है।दशकों बाद ऐसा प्रोत्साहन मोदी सरकार द्वारा युवाओं को मिला है इससे समाज की सोच में बदलाव आया है ।भारत के युवाओं को पता चलता है कि मोदी सरकार उनके प्रयासों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर सहयोग कर रही है ।मोदी सरकार ने ऐसी कई नीतियां बनाई जिनसे बड़े पैमाने पर युवाओं को खेल के क्षेत्र में कैरियर बनाने का अवसर मिल रहा है।

मोदी जी सरकार ने विश्वस्तरीय शिक्षा और कौशल विकास के अवसरों का सृजन किया है। इससे आज हमारे युवा सशक्त बन रहे हैं ।एक मजबूत श्रम शक्ति के निर्माण के सपनों को साकार करने में भी सहायक हैं। बीते नौ वर्षों में रिकॉर्ड संख्या में 23 नए आई आई टी ,20 नए आई एम, 789 विश्वविद्यालय,37240 कॉलेज और14443 स्टैंड अलोना स्थापित हुए है।प्रधानमंत्री कौशल विकास के तहत अब तक 1.34 से भी अधिक युवाओं ने कौशल विकास का प्रशिक्षण लिया है, जिससे उनकी रोजगार क्षमता में वृद्धि हुई है ।मोदी सरकार का प्रमुख उद्देश्य रहा है कि युवाओं को उनकी अपेक्षाओं के अनुरूप जो रोजगार मिल सके जिससे उनके परिवार को बेहतर और गुणात्मक जीवन प्राप्त हो सके ।आज भारत दुनिया भर के निवेशकों को आकर्षित कर रहा है। इससे करोड़ों भारतीयों के लिए जो रोजगार के अवसर सृजित हो रहे हैं।

आरामदायक जीवन(Ease of living) लोगों के जीवन में हकीकत होता जा रहा है ।शहरी क्षेत्र, ग्रामीण क्षेत्र ,गरीब या मध्यमवर्ग कल्याणकारी योजनाओं से इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश तक, सरकार की प्रक्रियाओं में परिवर्तन से लेकर सुरक्षात्मक नियमन तक मोदी सरकार की नीतियों का मुख्य उद्देश्य नागरिकों के लिए आरामदायक जीवन सफल हो रहा है। मोदी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि आरामदायक जीवन (ईज आफ लिविंग) की का उपादेयता कुछ खास लोगों तक सीमित ना होकर सभी नागरिक तक पहुंच सके ।

मोदी सरकार ने यह सुनिश्चित किया है कि मूलभूत सुविधाएं, बैंकिंग ,एलपीजी कनेक्शन ,स्वच्छता, बिजली, नल से जल और किफायती स्वास्थ्य सुविधाएं समाज के प्रत्येक वर्ग की पहुंच हो। देश के आकांक्षी वर्ग को दैनिक जीवन में महत्वपूर्ण बदलाव का अनुभव हो। धुआं रहित चूल्हा हो, अबाधित बिजली आपूर्ति (24× 7) प्रत्येक नागरिक के लिए सपना ना होकर एक वास्तविकता हो चुकी है। कर की कम दर और कर्ज की सस्ती दरें मध्यमवर्ग परिवारों में बड़ी बचत का माध्यम बनी है।

इससे उनकी खर्च करने की क्षमता में बढ़ोतरी हुई है ।आयकर की छूट में आए सकारात्मक बदलाव और प्रत्यक्ष कर में सुधारो उन पर करों के बोझ को कम किया है। ₹5लाख तक की आय में आयकर में छूट प्रभावी कर की दर 2013 में 12.7% से घटकर 2022 में 8.3% हो गई है ।उमंग ऐप के माध्यम से भारत के नागरिक विभिन्न सेवाओं को एक मंच पर प्राप्त कर सकेंगे। इससे उनके जीवन स्तर में सुधार आ रहा है। इसके अतिरिक्त इस ऐप के संचालन से देश के नागरिकों को विभिन्न सेवाओं का उपयोग करने के लिए किसी भी सरकारी कार्यालय में जाने की आवश्यकता नहीं पढ़ सकती है जिससे समय और पैसे दोनों की बचत हो रही है।

(लेखक राजनीतिक विश्लेषक हैं)

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