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आशा सिंह
 

  • प्रेम में भीगी कुछ पातियाँ

    प्रेम में भीगी कुछ पातियाँ

    दोस्तों सारा ब्रम्हांड भी जिस शब्द के लिए छोटा है। जिसमें से होकर गुजरते हैं पेड़ पौधे, जीव जंतु ,फूल फल, पक्षी, कीट पतंगे। कायनात की हर जीवित, मूर्त और अमूर्त वस्तु और वह शब्द है प्रेम।

  • लघु कथाओं में समाया साहित्य का विराट स्वरूप

    आज लघुकथा का दिन है और आज के दिन समीक्षाएं होती है हमारी लघुकथाओ की ।आदरणीय कान्ता जी तथा आदरणीय निरुपमा जी अपनी समीक्षाओं से सदैव मार्गदर्शन करती रहती हैं।मंच पर उनका हार्दिक अभिनंदन करती हूँ-रूपेंद्र राज तिवारी

  • एक चर्चा ऐसी भी, जिस पर हर कोई बात नहीं करना चाहता

    एक चर्चा ऐसी भी, जिस पर हर कोई बात नहीं करना चाहता

    सभ्यता में कई ऐसे मुद्दे है जिस पर नैतिकता के इस उस प्रकार के हवाले से सभ्य लोगों को परहेज है। इन में, समलैंगिकता भी एक ऐसा मुद्दा है जिस पर सभ्य लोगों का तबका बात करने से कतराता है। असल में समलैंगिकता पर ही नहीं लैंगिकता पर बात करने को भी लज्जास्पद माना जाता है। इस पर बात की जानी चाहिए।

  • ज्योति गजभिये की कहानी भूखे भेड़िये पर एक संवेदनशील विमर्श

    ज्योति गजभिये की कहानी भूखे भेड़िये पर एक संवेदनशील विमर्श

    विश्व मैत्री मंच पर सोमवार को ज्योति गजभिये की कहानी भूखे भेड़िये पर सार्थक प्रतिक्रियाओँ का दौर चला। यह कहानी स्त्री मन को परिभाषित करती एक स्त्री के जीवन की मार्मिक कथा है। जैसा कि शीर्षक से स्पष्ट है भूखे भेड़िए ...... यानी निर्ममता की पराकाष्ठा यानी स्त्री पीड़ा , स्त्री शोषण । इस कहानी की खूबी ये रही कि इसने नारी मन की गहराईयों को पूरी संवेदनशीलता के साथ प्रस्तुत किया। लेकिन आश्चर्य है कि इस कहानी पर विश्व मैत्री मंच की लेखिकाओं की की प्रतिक्रियाओँ की ही अधिकता रही, पुरुष लेखकों की प्रतिक्रिया नदारद थी।

  • विश्व मैत्री मंच पर कई रूपों में गूँजी ‘आवाज़’

    विश्व मैत्री मंच पर कई रूपों में गूँजी ‘आवाज़’

    आज विश्व मैत्री मंच आवाज़ शब्द से गुलज़ार होगा। आवाज़ जो चीख भी है, ध्वनि भी है, संगीत भी है साज़ भी है और संवाद भी। विश्व मैत्री मंच की लेखिकाओं ने आवाज़ विषय पर शब्दों का ऐसा जादू चलाया है कि कविता, गीत, हायकू के साथ आवाज़ ने कहीं सन्नाटा पैदा किया तो कहीँ आवाज़ एक गूँज बन गई तो कहीँ आवाज़ ने शोर को स्वर दिया। विश्व मैत्री मंच पर लेखकों का कम लेखिकाओँ का वर्चस्व ज्यादा दिखाई दे रहा है

  • विश्व मैत्री मंच पर कई रूपों में गूँजी ‘आवाज़’

    विश्व मैत्री मंच पर कई रूपों में गूँजी ‘आवाज़’

    आवाज़ पर सभी की सटीक, सुंदर रचनाएँ मंच पर आयी। और अंत में सुनीता जी का अध्यक्षीय उद्बोधन भी प्रोत्साहन से भरपूर रहा।

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