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डॉ. रामप्रताप गुप्ता गुप्ता
 

  • रोगियों के व्यापक हितों की रक्षा में चिकित्सा व्यवसाय की मुक्ति आज की एक बड़ी आवश्यकता

    राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि वह देखे कि देश में प्रदत्त चिकित्सा शिक्षा का स्तर श्रेष्ठ और ऊंचा हो और चिकित्सा सुविधाएं राष्ट्र के सभी भागों में सहज सुलभ हो। स्वतंत्रता के पूर्व स्थापित इस संस्था को सन 1956 में वैधानिक स्वरूप प्रदान कर उद्देश्यों की पूॢत हेतु इसे पर्याप्त अधिकार भी प्रदान कर दिए गए। किसी भी चिकित्सा महाविद्यालय को शुरू करने के पूर्व राष्ट्रीय चिकित्सा परिषद की पूर्व अनुमति आवश्यक बना दी गई ताकि वह यह देख सके कि चिकित्सा शिक्षा की

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