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अनिल त्रिवेदी
 

  • बढ़ती आबादी समस्या नहीं प्रति दिन उपलब्ध प्राकृतिक लोकऊर्जा है

    बढ़ती आबादी समस्या नहीं प्रति दिन उपलब्ध प्राकृतिक लोकऊर्जा है

    देश की आबादी से डरकर या भयभीत होकर या चिन्ता व्यक्त कर हम हमारे देश की लोकशक्ति या आबादी के प्रति अपनी जिम्मेदारी से भागने की भूमिका खड़ी करके अपनी कालप्रदत्त जिम्मेदारी से पिण्ड ही छुड़ाना चाहते हैं।

  • गैर संवैधानिक हस्तक्षेप, लोकतंत्र और समाज

    गैर संवैधानिक हस्तक्षेप, लोकतंत्र और समाज

    राजनीति, अर्थव्यवस्था, समाज, धर्म, पुलिस प्रशासन और निर्वाचन प्रक्रिया को गैर संवैधानिक शक्तियों के सामने भारतीय नागरिक आत्मसमर्पण करते निरन्तर देखता है तो वह सक्रिय नागरिकत्व की भूमिका त्याग देता है।

  • इको सिस्टम बनाम ईगो सिस्टम

    इको सिस्टम बनाम ईगो सिस्टम

    इको सिस्टम और ईगो सिस्टम दोनों ही इस धरती पर जीवन की गुणवत्ता को गहरे से प्रभावित करते हैं।हवा ,पानी ,प्रकाश, मिट्टी और अनन्त रूप स्वरूप की वनस्पतियों से इको सिस्टम अस्तित्व में आया। इको सिस्टम को जीवन का बीज भी कह या मान सकते हैं।

  • आजादी के पहले और उसके बाद का इन्दौरः क्या खोया क्या पाया

    आजादी के पहले और उसके बाद का इन्दौरः क्या खोया क्या पाया

    आज यदि गांधी नगर से बिचौली मर्दाना और तलावली चांदा से सिमरोल तक इन्दौर ही इन्दौर हो गया तो आपसी मेलजोल जान पहचान तो इतिहास बनेंगे हीं।दिन भर बाईक कार वाहन की रेलमपेल और भागमभाग इन्दौर की मुख्य जीवन चर्या हैं। किसीको कभी-भी सोचने-समझने विचारने की गुंजाइश ही नहीं हैं।यह आज के इन्दौर का नया रूप है।

  • राज, समाज की बाजार निष्ठा ने जीवन और अखबारों को व्यावसायिक उत्पाद बना डाला

    राज, समाज की बाजार निष्ठा ने जीवन और अखबारों को व्यावसायिक उत्पाद बना डाला

    आज की पत्रकारिता बाजार की चकाचौंध में बिकने वाली कलमकारी बन गयी हैं।आपकी लेखनी क़माल की है यह आज पत्रकारिता का मापदंड न होकर आप विज्ञापन जुटाने में क्या और कितना कर सकते हैं यह आपकी पत्रकारिता का मुख्य मापदंड बन गया है।

  • भारत में संकीर्ण राजनीतिक हलचलों से दूर अपने आप उभरते वैश्विक परिवार

    भारत में संकीर्ण राजनीतिक हलचलों से दूर अपने आप उभरते वैश्विक परिवार

    भारत की सरकारे भले ही वैश्विक दृष्टिकोण से काम नही कर पा रहीं हों ,अपने सामाजिक राजनीतिक संकुचित सोच से भी उबरना ही नहीं चाह रही हों। पर भारतीय समाज में एक ही परिवार के सदस्यों का अलग अलग देशों में रहने बसने से नये वैश्विक भारतीय परिवारों की संख्या में दिन दूनी रात चौगुनी गति से वृद्धि होते रहने का क्रम बढ़ता ही जा रहा है।

  • भारत में सबसे ताकतवर शक्ति कौन सी है?

    भारत में सबसे ताकतवर शक्ति कौन सी है?

    भारत की इतनी बड़ी लोकबिरादरी अपनी अनोखी जीवन यात्रा से बिना किसी को परेशान किए अनगिनत उत्पादक कार्यों में बिना किसी अपेक्षा के अपनी ऊर्जा का इस्तेमाल करती हैं। भारत के सत्तारूढ़ समूह हर काम इस अपेक्षा से करते हैं कि उनकी सत्ता और संगठन मजबूत हो

  • आनन्द का सनातन प्रवाह

    आनन्द का सनातन प्रवाह

    हिन्दूदर्शन या सनातन विचार ने विचार के चैतन्य स्वरूप या तारक शक्ति के विराट स्वरूप को समझाऔर सनातन सभ्यता के रूप में निरन्तर विस्तारित किया।जीवन और जीव की जड़ता या मारक शक्ति को स्वीकार नहीं किया।

  • सरकारी हिन्दू, असरकारी हिन्दू

    सरकारी हिन्दू, असरकारी हिन्दू

    सनातन समय से दुनिया भर में हिन्दू दर्शन,जिज्ञासा, जीवनी शक्ति और अध्यात्म की तलाश का विचार या मानवीय जीवनपद्धति ही रहा है।आज भी समूची दुनिया में उसी रूप में कायम हैं।साथ ही सनातन समय तक हिन्दू दर्शन इसी स्वरूप में रहेगा भी। हिन्दू शब्द से एक ऐसे दर्शन का बोध स्वत:ही होता आया है जिसे […]

  • जीवन कहने से नहीं करने से चलता है

    जीवन कहने से नहीं करने से चलता है

    मानवीय मूल्यों और ऊर्जा पर आधारित मानव समाज जीवन जीने का सनातन क्रम है जो मनुष्य को सतत् सक्रिय रहते हुए जीने की सतत् प्रेरणादायक ऊर्जा निरन्तर प्रदान करता है। आज का मनुष्य मन और तन की ऊर्जा के बजाय धन और यंत्र के तंत्र में उलझता जा रहा है।

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