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जयंती रंगनाथन
 

  • परदे के पीछे भी बहुत कुछ थी श्रीदेवी

    परदे के पीछे भी बहुत कुछ थी श्रीदेवी

    खामोशी उनके आगे-पीछे चलती थी। लेकिन बीच में खुशी थी, हंसी थी और जिंदगी थी। उन्हीं लम्हों में रहती थीं श्रीदेवी, अपनों के बीच, अपनों की दुनिया में, दूसरों को सपने बांटती हुईं...। ऐसा क्यों लग रहा है, जैसे कोई अदृश्य सी शक्ति, जो पिछले चार दशकों से आपको आगे बढ़ने, चुनौतियों का मुकाबला करने की ताकत देती आ रही थी, वह अचानक बंद मुट्ठी से रेत की मानिंद सरक गई? कौन थी वह? एक बेहतरीन अदाकारा, एक बेहद खूबसूरत औरत, कुछ गलत-कुछ सही निर्णय लेने वाली एक मानवीय स्त्री, एक जुझारू औरत, जो जिंदगी के हर मुकाम पर शांति और शिद्दत से बाजी जीतती रही या एक हमउम्र आइडल? शायद ये सब कुछ।

  • ज्वैल थीफः  फिल्मी दुनिया के वो रिश्ते, वो हुनर और वो सुनहरे दिन

    ज्वैल थीफः फिल्मी दुनिया के वो रिश्ते, वो हुनर और वो सुनहरे दिन

    अपने समय से आगे की सोच थी 1967 में बनी फिल्म 'ज्वैल थीफ' में। आज भी इस फिल्म का जादू बरकरार है। इस फिल्म के निर्माण से जुड़े रोचक किस्से बता रही हैं दैनिक ‘हिन्दुस्तान’ फीचर एडिटर जयंती रंगनाथन

  • आशा भोसले के जीवन के कुछ खास रंग

    हिंदी सिनेमा में यूं तो गायकों की लंबी फेहरिस्‍त है, लेकिन आशा भोंसले किसी परिचय की मोहताज नहीं है। आशा भोंसले आज अपना 83वां जन्मदिन मना रही हैं।

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