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ललित कौशिक
 

  • 1966 से वर्तमान तक 10वें मुख्यमंत्री का राज देख रहा है हरियाणा

    1966 से वर्तमान तक 10वें मुख्यमंत्री का राज देख रहा है हरियाणा

    भगवत दयाल शर्मा ने 10 मार्च 1967 को दोबारा सरकार बनाई। सरकार बनने के बाद जश्न मना रहे पंडित जी को मात्र 13 दिन बाद ही सत्ता

  • असंवैधानिक अनुच्छेद 35-ए से छुटकारा कब होगा

    श्रीनगर समेत दक्षिण जम्मू-कश्मीर के कई इलाकों में सुरक्षाबलों की अतिरिक्त तैनाती की गई है।

  • उत्पादन बढ़ा फिर भी भूख से मौतें

    राजनीति के विद्वान आचार्य चाण्कय ने कहा था, जिस दिन जनता के सोने के बाद बाद राजा सोएगा और जनता के खाने के बाद राजा खाऐगा, उस दिन देश में राम राज्य आ जाएगा। यही राजनेता चुनावों के दौरान अपनी राजनीति रैलियों में लंबे-लंबे भाषण देते है और देश में राम राज्य स्थापित करने

  • पूर्व राष्ट्रपति को लेकर मीडिया, सोशल मीडिया मंथन

    पूर्व राष्ट्रपति को लेकर मीडिया, सोशल मीडिया मंथन

    पूर्व राष्ट्रपति डॉ. प्रणव मुखर्जी की मीडिया में इन दिनों चर्चा का विषय बना हुआ है। चर्चा में बननें का एक ही विषय है, कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के निमत्रण पर 7 जून को आरएसएस मुख्यालय

  • राष्ट्रनीति के बिना राजनीति अधूरी है।

    आप लोगों ने अक्सर देश के अंदर राजनीति पार्टियों के नाम पर चुनाव होते हुए देखा होगा। कोई कांग्रेस पार्टी के नाम पर चुनाव लड़ता है, तो कोई भाजपा के नाम पर तो कोई सपा और बसपा के नाम पर। लेकिन वास्तव में जिस चिरविजयी राष्ट्र के नाम पर उसकी पहचान है। उसके नाम पर कोई चुनाव नही लड़ता। इसी आबोहवा के अंदर देश में कई संगठनों का निर्माण भी हुआ, ले

  • मोदी के लिए टूटते प्रोटोकॉल

    मोदी के लिए टूटते प्रोटोकॉल

    देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का कद विश्व समुदाय के सामनें लगातार इतना बढ़ रहा है, कि भारत के पीएम 30 साल बाद स्वीडन की यात्रा पर गए। पहली बार स्वीडन के प्रधानमंत्री ने अपनी परंपरा तोड़कर नरेंद्र मोदी की अगुवाई के लिए एयरपोर्ट पर स्वागत किया। उनके द्वारा पीएम मोदी को रिसीव करना हमारे लिए गर्व की बात है, कि किसी देश का प्रधानमंत्री भारत के प्रधानमंत्री के अगुवाई के लिए अपनी परंपरा को तोड़ने पर भी विवश हो जाए। बात यहीं पर समाप्त नही हो जाती है। बल्कि कॉमनवेल्थ समिट में आने वाले 52 देशों के प्रमुखों में से मोदी ही अकेले ऐसे प्रधानमंत्री

  • कब मिलेगा घाटी के विस्थापित हिंदुओं को न्याय ?

    कब मिलेगा घाटी के विस्थापित हिंदुओं को न्याय ?

    जम्मू-कश्मीर से हिंदू समाज को बाहर करने की तैयारी तो मुसलमानों ने आजादी के समय 1947 से पहले शुरू कर दी थी। पर उस समय तब उनकी आबादी इतनी ज्यादा नही थी, लेकिन बहुसंख्यक समाज पर उनके अत्याचार शुरु होने शुरु हो गए थे। 1980 के दशक में आते-आते उन्होंने हिंदुओं को सरेराह पीटना शुरु कर दिया था और माताओं बहनों की इज्जत को सरेराह बीच बाजार

  • ओछे हथकंडे पर उतारू होती राजनीति

    हां आम लोगों की सुरक्षा के लिए किसी प्रकार की कोई घटना घाटी में न घटे तो सेना का एक अधिकारी एक पत्थरबाज को ढाल बनाकर होने वाली अनहोनी घटना को रोकता है। तो उसके खिलाफ तुरंत एफआरआई दर्ज करवाने का आदेश सरकार देती है। इसी प्रकार सेना की टुकड़ी पर हमला करने वारे के खिलाफ जब सेना बचाव पक्ष में गोली चलाती है, तो उस मामलें में भी सेना के मेजर आदि

  • आतंकियों की हमदर्द जम्मू कश्मीर सरकार

    देश के अंदर राजनीति इस हद तक गिरने पर उतारू हो जाएगी ऐसा कभी सोचा भी नही था। कोई दलितों के नाम पर राजनीति कर रहा है, कोई पटेलों पर तो कहीं जाटों पर। राजनीति का स्तर इतना गिर चुका है कि कर्नाटक में सत्ता हथियाने के लिए लिंगायत समाज को अल्पसंख्यक का दर्जा देकर उसको भी अलग से धर्म मान लिया गया। कहीं कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी 1984 के सिख दंगों के आरोपी कांग्रेसी नेता जगदीश टाइटलर और सज्जन कुमार को लेकर सांप्रदायिक सद्भावना के लिए दिल्ली के राजघाट पर 5 घंटे का उपवास रखते हैं। तो ऐसे माहौल में जम्मू-कश्मीर की मुख्यमंत्री महबूबा मुफ्ती चुप क्यों रहे। उसने भी अपने पुराने साथियों को एकत्र करने का कार्य शुरु कर दिया। तभी तो सीएम को देशद्रोहियों और देशभक्तों में अंतर नजर नहीं आ रहा। इसलिए तो महबूबा मुफ्ती पत्थरबाजों और सुरक्षाबलों में गलत और ठीक का आकलन जानबूझकर नहीं करना चाहती। देश में चारों ओर सभी दल राजनीति में अपने चहेते वोट बैंक को इकट्ठा करने में व्यस्त हैं। तो माहौल का फायदा उठाने में महबूबा मुफ्ती क्यों पीछे रहे। उसने भी अपने पुराने हमदर्द रहे अलगाववादियों को फिर राजी करना शुरू कर दिया है।

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